उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्रों को बड़ी राहत, मानदेय 10,000 से बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रतिमाह
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के लाखों शिक्षामित्रों को बड़ी सौगात देते हुए उनके मानदेय में उल्लेखनीय वृद्धि का निर्णय लिया है। बेसिक शिक्षा विभाग से जारी शासनादेश के अनुसार अब परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों को 10,000 रुपये प्रतिमाह के स्थान पर 18,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। यह नई व्यवस्था 01 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएगी।
यह निर्णय अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा जारी आदेश के तहत लिया गया है, जिसे बेसिक शिक्षा अनुभाग-5, लखनऊ से जारी किया गया। शासन के इस कदम को शिक्षामित्रों के लंबे समय से चल रहे मांगों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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प्रदेश में वर्तमान समय में लगभग 1,42,929 शिक्षामित्र कार्यरत हैं, जो प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को शिक्षा देने के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। शिक्षामित्र योजना की शुरुआत वर्ष 1999 में इस उद्देश्य से की गई थी कि प्रदेश में शिक्षक-छात्र अनुपात को संतुलित रखा जा सके और प्राथमिक शिक्षा का सार्वभौमिकरण सुनिश्चित हो।
सरकार के इस फैसले के अनुसार शिक्षामित्रों को वर्ष में 11 माह तक 18,000 रुपये प्रतिमाह की दर से मानदेय दिया जाएगा। पहले यह राशि मात्र 10,000 रुपये थी, जिसे अब लगभग 80 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है। इस बढ़ोतरी से शिक्षामित्रों की आर्थिक स्थिति में सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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शासनादेश में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया है कि संबंधित विभाग इस आदेश का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करें। इसके लिए महानिदेशक, स्कूल शिक्षा सहित विभिन्न अधिकारियों को आदेश की प्रतिलिपि भेजी गई है ताकि समयबद्ध तरीके से इसका क्रियान्वयन किया जा सके।
इस फैसले के बाद प्रदेश के शिक्षामित्रों में खुशी की लहर देखी जा रही है। लंबे समय से मानदेय वृद्धि की मांग को लेकर आंदोलन और ज्ञापन दिए जा रहे थे। ऐसे में सरकार का यह निर्णय उनके लिए राहत भरा साबित हो सकता है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसले से न केवल शिक्षामित्रों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिलेगा। बेहतर आर्थिक स्थिति के चलते शिक्षामित्र अपने कार्य को और अधिक समर्पण के साथ कर सकेंगे, जिसका सीधा लाभ छात्रों को मिलेगा।
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हालांकि, कुछ संगठनों का कहना है कि यह वृद्धि स्वागतयोग्य है, लेकिन अभी भी स्थायी समाधान की आवश्यकता है। शिक्षामित्र लंबे समय से स्थायी नियुक्ति की मांग भी करते रहे हैं, जिस पर सरकार को आगे विचार करना होगा।
फिलहाल, मानदेय में यह वृद्धि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में एक सकारात्मक बदलाव के रूप में देखी जा रही है, जिससे हजारों परिवारों को आर्थिक संबल मिलेगा और शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार होगा।
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