प्रशासनिक उदासीनता या मिलीभगत? शहर की सेहत से खिलवाड़

देवरिया में नगर पालिका की घोर लापरवाही, जिला जेल के पास खुले में फेंका जा रहा संक्रमित मेडिकल वेस्ट, महामारी का खतरा


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। एक ओर केंद्र व राज्य सरकारें स्वच्छ भारत अभियान और संक्रामक रोगों की रोकथाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर नगर पालिका परिषद देवरिया की गंभीर लापरवाही शहरवासियों की सेहत पर भारी पड़ सकती है। जिला जेल के समीप, प्रमुख कुष्ट आश्रम के ठीक सामने देवरिया–सलेमपुर मुख्य मार्ग किनारे खुलेआम संक्रमित मेडिकल वेस्ट फेंका जा रहा है। यह नजारा न केवल प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है, बल्कि बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों की खुली अवहेलना भी है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क किनारे सिरिंज, इस्तेमाल की गई पट्टियां, दवाइयों की खाली बोतलें, इंजेक्शन और अन्य खतरनाक मेडिकल कचरा लंबे समय से पड़ा है। हैरानी की बात यह है कि इसी मार्ग से नगर पालिका और अन्य विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों का नियमित आवागमन होता है, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। नगर पालिका के कूड़ा ढोने वाले वाहन इस संवेदनशील कचरे को सामान्य घरेलू कचरे की तरह आबादी वाले इलाके के पास डंप कर रहे हैं, जो कानूनन अपराध है।

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इस लापरवाही से राहगीरों, स्थानीय निवासियों और आवारा पशुओं के जीवन पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। खुले में पड़े मेडिकल कचरे को जानवर मुंह मारते हैं, जिससे रेबीज, हेपेटाइटिस, एचआईवी और अन्य गंभीर संक्रामक रोगों के फैलने की आशंका बढ़ गई है। बारिश के दौरान यही कचरा पानी के साथ बहकर आसपास के इलाकों में पहुंच सकता है, जिससे महामारी जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि यह कृत्य जिला जेल और कुष्ट आश्रम जैसे संवेदनशील स्थान के सामने किया जा रहा है, जहां पहले से ही स्वास्थ्य संबंधी जोखिम अधिक होते हैं। नियमों के अनुसार, मेडिकल वेस्ट का निस्तारण केवल अधिकृत एजेंसियों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए, लेकिन देवरिया में नियमों को ताक पर रख दिया गया है।

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अब जनता नगर पालिका अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी से सीधे जवाब मांग रही है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? मेडिकल वेस्ट फेंकने वाले कर्मचारियों और ठेकेदारों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? स्वास्थ्य विभाग और नगर पालिका के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा आम जनता क्यों भुगते? जिला प्रशासन को चाहिए कि वह तत्काल संज्ञान लेकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे, अन्यथा यह लापरवाही देवरिया के लिए भारी संकट बन सकती है।

Editor CP pandey

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