पुलिस की भूमिका संदिग्ध, 5 महीने से न्याय के लिए भटक रही पीड़िता
बलिया(राष्ट्र की परम्परा)
सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के वसारिखपुर गांव में महिला सुरक्षा को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गांव की 38 वर्षीय महिला अंशु पत्नी जमशेद के घर में घुसकर छेड़छाड़, कपड़े फाड़ने और मारपीट जैसी संगीन वारदात को अंजाम देने के बावजूद पुलिस ने सिर्फ एनसीआर दर्ज कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। पीड़िता का आरोप है कि 28 जुलाई की रात गांव के कुछ दबंग जबरन उसके घर में घुसे, उसके साथ छेड़छाड़ की, कपड़े फाड़ दिए और पिटाई करते हुए जान से मारने की धमकी दी। घटना के बाद से वह लगातार थाना, तहसील और जिला मुख्यालय के चक्कर काट रही है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और पीड़िता व उसके परिवार को लगातार धमका रहे हैं। पीड़िता ने बताया कि उसका पति विदेश में नौकरी करता है और वह घर में अकेली रहती है, इसी का फायदा उठाकर दबंग तत्व उसे निशाना बना रहे हैं। ग्रामीणों में भी इस मामले को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है जब घर में घुसकर छेड़छाड़ जैसी घटना पर भी मुकदमा दर्ज नहीं होगा, तो आम महिलाएं खुद को सुरक्षित कैसे समझेंगी? पुलिस आखिर किस दबाव में काम कर रही है पीड़िता ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक बलिया से मांग की है कि एनसीआर को तुरंत मुकदमे में बदला जाए, आरोपियों की गिरफ्तारी हो और उसे व उसके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए। यह घटना न सिर्फ पुलिस की संवेदनहीन कार्यप्रणाली को उजागर करती है, बल्कि सरकार के महिला सुरक्षा के तमाम दावों की भी पोल खोलती है। अब बड़ा सवाल यह है क्या प्रशासन जागेगा या पीड़िता यूं ही न्याय के लिए दफ्तरों की धूल फांकती रहेगी?
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