33 फुट शिवलिंग: कैसे बना महाबलीपुरम से चंपारण तक का दिव्य सफर

विश्व का सबसे ऊंचा 33 फुट शिवलिंग आज बिहार के विराट रामायण मंदिर में स्थापित, ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनेगा चंपारण

पूर्वी चम्पारण (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के चकिया स्थित विराट रामायण मंदिर आज एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक उपलब्धि का साक्षी बनने जा रहा है। यहां विश्व के सबसे ऊंचे 33 फुट शिवलिंग की विधिवत स्थापना की जा रही है। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि स्थापत्य, संस्कृति और पर्यटन के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शिवलिंग स्थापना से पूर्व समस्तीपुर की सांसद शांभवी चौधरी और उनके पति शायन कुणाल ने विधिवत पूजा-पाठ किया। वाराणसी, अयोध्या राम मंदिर, काशी विश्वनाथ, गुजरात, हरिद्वार, महाराष्ट्र और महावीर मंदिर पटना से आए कुल सात से अधिक विद्वान पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अनुष्ठान संपन्न कराया। सहस्त्र लिंगम स्थापना के अवसर पर चारों वेदों के विद्वानों द्वारा भव्य यज्ञ भी किया जा रहा है।

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इस महाआयोजन के लिए कंबोडिया और कोलकाता से विशेष फूल मंगाए गए हैं। मंदिर परिसर में एक ट्रक से अधिक फूल पहुंच चुके हैं, जिनमें गुलाब, गेंदा, गुलदाउदी प्रमुख हैं। शिवलिंग पर अर्पण के लिए 18 फुट लंबी विशेष माला तैयार की गई है, जिसमें फूलों के साथ भांग, धतूरा और बेलपत्र सम्मिलित हैं।
33 फुट ऊंचे और 210 मीट्रिक टन वजनी इस शिवलिंग को स्थापित करने के लिए राजस्थान और भोपाल से 750-750 टन क्षमता की दो विशाल क्रेन मंगाई गई हैं। स्थापना से पूर्व इन क्रेनों का ट्रायल रन भी सफलतापूर्वक किया गया। पूरी तकनीकी मॉनिटरिंग टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (TCS) द्वारा की जा रही है।
शिवलिंग के अभिषेक हेतु कैलाश मानसरोवर, गंगोत्री, यमुनोत्री, हरिद्वार, प्रयागराज, गंगासागर, सोनपुर और रामेश्वरम से गंगाजल मंगाया गया है। इसके अतिरिक्त सिंधु, नर्मदा, नारायणी, कावेरी और गंडक नदियों के जल से भी अभिषेक किया जाएगा। आज माघ कृष्ण चतुर्दशी तिथि है, जिसे शिवलिंग उत्पत्ति का दिन माना जाता है, इसलिए यह दिन विशेष रूप से चुना गया है।

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान सहित कई मंत्री, सांसद और विधायक इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनेंगे। लाइव दर्शन के लिए मंदिर परिसर में चार बड़े LED स्क्रीन लगाए गए हैं।
यह विशाल शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम में एक ही ग्रेनाइट पत्थर से तैयार किया गया है। इसके निर्माता विनायक वेंकटरमण के अनुसार, इस पर करीब 3 करोड़ रुपये की लागत आई है और इसे भूकंपरोधी तकनीक से बनाया गया है, ताकि यह सैकड़ों वर्षों तक सुरक्षित रहे। मुख्य शिल्पकार लोकनाथ और उनकी टीम ने इसे दस वर्षों में तराशा।

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विराट रामायण मंदिर, आचार्य किशोर कुणाल का ड्रीम प्रोजेक्ट है। इसके पूर्ण होने पर यह विश्व का सबसे बड़ा शिव मंदिर होगा। शिवलिंग स्थापना के बाद कैथवलिया और मोतिहारी वैश्विक धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर उभरेंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती मिलेगी।

Editor CP pandey

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