लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के साथ मुलाकातों ने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को बढ़ा दिया है। इन बैठकों के बीच अक्टूबर में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर भी पार्टी की रणनीति पर निगाहें टिक गई हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई। हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से बैठक के विस्तृत एजेंडे की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
इससे एक दिन पहले शुक्रवार को ग्रेटर नोएडा में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के दौरान मुख्यमंत्री की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ मौजूदगी रही थी। इसके बाद शनिवार को दिल्ली में शीर्ष भाजपा नेतृत्व के साथ मुख्यमंत्री की बैठकों का सिलसिला राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बन गया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के साथ भी मुख्यमंत्री की बैठक को संगठन और आगामी चुनावी तैयारियों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
राज्यसभा चुनाव पर भी टिकी नजर
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर 2026 को मतदान होना है। निर्वाचन कार्यक्रम के मुताबिक 29 सितंबर को अधिसूचना जारी होगी, जबकि नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर निर्धारित है। मतदान के बाद उसी दिन मतगणना होगी।
इन 10 सीटों पर होने वाला चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2027 के विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले ही राजनीतिक दलों को राज्यसभा के लिए अपने उम्मीदवारों और रणनीति को अंतिम रूप देना होगा। मौजूदा विधानसभा संख्या बल के आधार पर अलग-अलग राजनीतिक विश्लेषण सामने आ रहे हैं, लेकिन अंतिम तस्वीर उम्मीदवारों, समर्थन और मतदान की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
पुराने चेहरों पर भरोसा या नए नामों को मौका?
राज्यसभा चुनाव के साथ भाजपा के सामने उम्मीदवारों के चयन को लेकर भी मंथन का दौर माना जा रहा है। सवाल यह है कि कार्यकाल पूरा कर रहे मौजूदा सदस्यों में से कितने चेहरों को दोबारा मौका मिलता है और कितनी सीटों पर नए नाम सामने आते हैं।
उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व जैसे पहलुओं पर चर्चा स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण होगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल तक क्षेत्रीय संतुलन, विभिन्न सामाजिक समूहों का प्रतिनिधित्व और संगठन की जरूरतें संभावित चयन के प्रमुख संदर्भों में रह सकती हैं। हालांकि, अंतिम उम्मीदवारों के नाम सामने आने तक किसी निश्चित फार्मूले का दावा करना जल्दबाजी होगी।
2027 की तैयारी का भी अहम पड़ाव
भाजपा संगठन पहले से ही 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर जमीनी तैयारियों में जुटा है। हाल में भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने उत्तर प्रदेश में बूथ, शक्ति केंद्र, मंडल और जिला स्तर तक संगठन की तैयारियों की समीक्षा की थी।
ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह और नितिन नबीन के साथ बैठकों को राज्यसभा चुनाव के साथ-साथ व्यापक राजनीतिक और संगठनात्मक तैयारियों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
फिलहाल इन बैठकों में किसी उम्मीदवार के नाम या किसी विशेष चुनावी फार्मूले को अंतिम रूप दिए जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। आने वाले दिनों में राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि भाजपा ने किन सामाजिक, क्षेत्रीय और संगठनात्मक पहलुओं को प्राथमिकता दी है। साथ ही, 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर भी इन बैठकों के प्रभाव सामने आने की संभावना है।
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