पटना/लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)छठ महापर्व की पवित्र शुरुआत नहाय-खाय से हो चुकी है और आज रविवार, 26 अक्टूबर 2025 को खरना पूजा का पावन दिन है। इस दिन व्रती महिलाएं और पुरुष सूर्य देव व छठी मैया की आराधना करते हुए व्रत की शुद्धता और संकल्प को दृढ़ करते हैं। घर-आंगन में तैयारियों का उत्साह और भक्ति का वातावरण छठ के इस विशेष दिन को और भी मंगलमय बना देता है।
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🕕 खरना का शुभ मुहूर्त और पूजा का समय– इस वर्ष खरना पूजा 26 अक्टूबर 2025 को मनाई जा रही है। सूर्योदय: सुबह 6:29 बजेसूर्यास्त: शाम 5:41 बजे व्रती महिलाएं सूर्यास्त के बाद यानी शाम 5:41 बजे के बाद खरना का पूजन और प्रसाद अर्पण करेंगी। इसी क्षण सूर्य देव और छठी मैया की आराधना से पूरे परिवार पर आशीर्वाद की वर्षा होती है।
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🍚 खरना की पूजा विधि और प्रसाद का महत्व– खरना के दिन व्रती सुबह जल्दी उठकर स्नान कर पवित्र वस्त्र धारण करती हैं। पूरे दिन बिना जल ग्रहण किए व्रत रखा जाता है।
सूर्यास्त के बाद व्रती मिट्टी के नए चूल्हे पर आम की लकड़ी से गुड़, दूध और चावल की खीर बनाती हैं। इसके साथ गेहूं के आटे की रोटी या पूरी तैयार की जाती है।
सबसे पहले यह प्रसाद सूर्य देव और छठी मैया को अर्पित किया जाता है। फिर व्रती स्वयं इसे ग्रहण करती हैं। इसी क्षण से शुरू होता है 36 घंटे का निर्जला उपवास, जो उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद समाप्त होता है।
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🌻 ‘खरना’ का अर्थ और महत्व
‘खरना’ का अर्थ होता है शुद्धता — शरीर, मन और आत्मा की पवित्रता का संकल्प। इस दिन की गई पूजा से घर का वातावरण शुद्ध और सकारात्मक बनता है।
मिट्टी के नए चूल्हे का प्रयोग, गंगाजल से शुद्धिकरण और सात्विक आहार की तैयारी इस पर्व की प्रमुख परंपराएं हैं। ऐसा माना जाता है कि खरना की पूजा करने से सूर्य देव और छठी मैया की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जिससे परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
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🙏 भक्ति और विश्वास का पर्व
छठ महापर्व न केवल आस्था का प्रतीक है बल्कि यह परिवार, अनुशासन और पर्यावरण की पवित्रता का उत्सव भी है। खरना से लेकर उगते सूर्य को अर्घ्य देने तक का हर चरण आत्मसंयम और श्रद्धा की पराकाष्ठा को दर्शाता है।
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