नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में रविवार को INDIA गठबंधन की महारैली के जरिए विपक्ष ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ सियासी मोर्चा खोल दिया। कथित ‘वोट चोरी’, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर उठे सवालों के बीच विपक्ष के दिग्गज नेताओं ने एक मंच से अपनी आवाज बुलंद की। राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की मौजूदगी ने रैली को सियासी तौर पर खास बना दिया।
रैली को संबोधित करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लंबे समय से वोट चोरी हो रही है और 2024 के लोकसभा चुनाव सहित कई विधानसभा चुनावों में ईवीएम के जरिए गड़बड़ी हुई। हालांकि, ये आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाना जरूरी है। उन्होंने उनके खिलाफ कार्रवाई और जेल जाने तक की बात कही। राहुल ने कथित वोट चोरी को केवल चुनावी गड़बड़ी नहीं, बल्कि हर भारतीय की आवाज और अभिव्यक्ति के अधिकार से जुड़ा गंभीर सवाल बताया।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि उनके लिए हर भारतीय की आवाज धर्म से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह हिंसा में विश्वास नहीं करते और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या अमित शाह को अपना दुश्मन नहीं मानते। उनके इस बयान के जरिए लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों का मुद्दा केंद्र में रहा।
अमित शाह के बयान पर पलटवार करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी चाहकर भी भाग नहीं पाएंगे। उनके इस हमलावर अंदाज ने रैली के राजनीतिक तापमान को और बढ़ा दिया।
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने संबोधन में रामलीला मैदान को लोकतंत्र का ‘हल्दीघाटी’ करार दिया। उन्होंने कहा कि यहां नया इतिहास लिखा जा रहा है और देश में राजनीतिक परिवर्तन कभी भी हो सकता है। भाजपा पर निशाना साधते हुए अखिलेश ने कहा कि नई पीढ़ी अपने ऊपर पड़ी हर लाठी और मिले हर जख्म का हिसाब लेगी। उन्होंने युवाओं के मुद्दे उठाते हुए सरकार की नीतियों पर भी सवाल खड़े किए।
महारैली में विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए। मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी रैली के प्रमुख मुद्दों में शामिल रही। विपक्ष का कहना है कि मतदाताओं के अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता की रक्षा जरूरी है।
रामलीला मैदान से निकले इन बयानों ने सियासी बहस को तेज कर दिया है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि विपक्ष के आरोपों पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीति की दिशा को कितना प्रभावित करता है।
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