ट्रंप के टैरिफ यू-टर्न, विदेशी बिकवाली और जियो IPO: भारत की अर्थव्यवस्था की अग्निपरीक्षा

भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने निर्णायक मोड़! विदेशी निवेशकों का भरोसा बहाल करने के लिए कर नीति में बदलाव की मांग, खाद्य महंगाई पर नियंत्रण की चुनौती, रिलायंस जियो के प्रस्तावित मेगा आईपीओ और स्टारलिंक की प्रतिस्पर्धा के बीच वैश्विक व्यापार की नई दिशा पर नजर

लेखक: एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया, महाराष्ट्र

गोंदिया (महाराष्ट्र)। वैश्विक अर्थव्यवस्था आज ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां एक ओर विदेशी निवेशकों की बिकवाली, मुद्रा बाजार की अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक तनाव भारतीय शेयर बाजार की परीक्षा ले रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रिलायंस जियो का प्रस्तावित विशाल आईपीओ, उपग्रह इंटरनेट की बढ़ती प्रतिस्पर्धा और अंतरराष्ट्रीय चावल व्यापार में भारत की भूमिका नए अवसरों के संकेत दे रही है।
केंद्रीय वित्तमंत्री के सामने आगामी बजट 2027 में सबसे महत्वपूर्ण चुनौती राजस्व संग्रह और निवेशकों के भरोसे के बीच संतुलन स्थापित करने की होगी। विशेष रूप से दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (एलटीसीजी) और प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) की समीक्षा, विदेशी पूंजी के प्रवाह को मजबूत करने तथा आम उपभोक्ताओं को खाद्य महंगाई से राहत देने जैसे मुद्दे आर्थिक बहस के केंद्र में हैं।
मैं, एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया, महाराष्ट्र, का स्पष्ट मत है कि बजट 2027 में इन विषयों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। भारत को विदेशी निवेशकों से केवल पूंजी ही नहीं, बल्कि दीर्घकालिक भरोसा, बाजार में पर्याप्त तरलता, रोजगार के अवसर और उद्योगों के विस्तार के लिए वित्त भी चाहिए।
सरकार एलटीसीजी की दर में संभावित कमी, दीर्घकालिक निवेश को प्रोत्साहन और एसटीटी की प्रतिस्पर्धात्मक समीक्षा जैसे विकल्पों पर विचार कर सकती है। हालांकि, केवल करों में कटौती से विदेशी निवेश की वापसी सुनिश्चित नहीं होती। वैश्विक ब्याज दरें, डॉलर की मजबूती, कंपनियों की कमाई और भू-राजनीतिक जोखिम भी निवेशकों के निर्णयों को प्रभावित करते हैं। इसलिए राजस्व पर प्रभाव, निवेश की अवधि और बाजार की स्थिरता को ध्यान में रखते हुए संतुलित सुधार आवश्यक हैं।
एलटीसीजी और एसटीटी पर फैसला: विदेशी निवेशकों को रोकने की चुनौती
भारतीय शेयर बाजार की प्रमुख चिंताओं में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की बिकवाली शामिल है। अक्टूबर 2026 में सामने आई एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में इक्विटी पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर समाप्त करने और निवेश की न्यूनतम अवधि दो से तीन वर्ष करने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करने की बात कही गई। इसका उद्देश्य अल्पकालिक और अस्थिर विदेशी पूंजी के प्रभाव को कम करना तथा दीर्घकालिक निवेश को प्रोत्साहित करना है।
रिपोर्ट में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में उस समय तक विदेशी निवेशक लगभग 44,166 करोड़ रुपये की इक्विटी बेच चुके थे, जबकि वर्ष 2026 में उनकी कुल निकासी लगभग 3.04 लाख करोड़ रुपये बताई गई। इन आंकड़ों को रिपोर्ट के प्रकाशन के समय की स्थिति के रूप में समझना चाहिए, न कि पूरे वर्ष के अंतिम परिणाम के रूप में।
वर्तमान कर व्यवस्था में निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले सूचीबद्ध इक्विटी शेयरों और इक्विटी-केंद्रित म्यूचुअल फंडों की एक वर्ष से अधिक की निर्धारित अवधि के बाद बिक्री से प्राप्त पात्र दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ में 1.25 लाख रुपये से अधिक की राशि पर सामान्यतः 12.5 प्रतिशत एलटीसीजी कर लागू होता है।
वहीं, प्रतिभूति लेनदेन कर यानी एसटीटी की दर लेनदेन के प्रकार के अनुसार अलग-अलग होती है। एक अप्रैल 2026 से लागू बताई गई दरों के अनुसार, डिलीवरी आधारित शेयर खरीद और बिक्री पर 0.1 प्रतिशत प्रति पक्ष, इंट्राडे बिक्री पर 0.025 प्रतिशत, वायदा कारोबार पर 0.05 प्रतिशत और विकल्प कारोबार के प्रीमियम पर 0.15 प्रतिशत एसटीटी की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। विकल्पों के प्रयोग पर भी निर्धारित आधार पर एसटीटी लागू होता है। इसलिए एसटीटी को एक समान दर वाला कर मानना उचित नहीं होगा।
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम 2026 में वित्तमंत्री ने एलटीसीजी और एसटीटी में बदलाव को लेकर कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया। उन्होंने कहा कि बजट की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और सरकार निवेशकों के विचार सुनने के लिए तैयार है, लेकिन इस स्तर पर संभावित प्रस्तावों पर प्रतिबद्धता जताना जल्दबाजी होगी।
इसलिए करों में बदलाव को लेकर अभी किसी अंतिम निर्णय का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। बजट 2027 में निवेशकों के लिए स्पष्ट कर नीति, दीर्घकालिक निवेश को प्रोत्साहन और एसटीटी की प्रतिस्पर्धात्मक समीक्षा महत्वपूर्ण विषय बन सकते हैं।
चावल की कीमतों में उछाल: कमजोर फसल, त्योहारों की मांग और वैश्विक खाद्य सुरक्षा की परीक्षा
भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने दूसरी बड़ी चुनौती खाद्य महंगाई है। चावल केवल कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों की थाली, किसानों की आय, निर्यात कारोबार और वैश्विक खाद्य सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण अनाज है।
17 सितंबर 2026 की रॉयटर्स रिपोर्ट के अनुसार, कमजोर मानसून और बुवाई क्षेत्र में कमी के कारण भारत का चावल उत्पादन लगभग 154 मिलियन टन से घटकर 144 मिलियन टन रह सकता है। इस प्रकार करीब 10 मिलियन टन की संभावित गिरावट का अनुमान लगाया गया। यदि उत्पादन में इतनी कमी आती है, तो घरेलू उपलब्धता और निर्यात कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
भारतीय चावल निर्यातक महासंघ के अनुसार, भारत के पांच प्रतिशत टूटे सफेद चावल का निर्यात मूल्य लगभग 385 से 390 डॉलर प्रति मीट्रिक टन बताया गया। इसके मुकाबले वियतनाम का भाव 440 से 450 डॉलर और थाईलैंड का लगभग 480 डॉलर प्रति टन बताया गया है। इन दरों के आधार पर भारतीय चावल अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति बनाए हुए है।
हालांकि, घरेलू खुदरा बाजार में कुछ किस्मों के दाम में कुछ ही दिनों के भीतर 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी के दावों को स्थानीय बाजार और संबंधित अवधि के आंकड़ों से सत्यापित किए बिना पूरे देश पर लागू करना उचित नहीं होगा।
सरकारी भंडार के मामले में भी आंकड़ों की तारीख और उनकी परिभाषा महत्वपूर्ण है। उपलब्ध रिपोर्ट में एक सितंबर को भारत का चावल भंडार लगभग 59.6 मिलियन टन बताया गया था, जो निर्धारित बफर आवश्यकता से अधिक था। ऐसे में 38 मिलियन टन के आंकड़े को वर्तमान कुल सरकारी भंडार का अंतिम आंकड़ा मानने से पहले यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि वह किस तारीख और किस श्रेणी के भंडार से संबंधित है।
पर्याप्त सरकारी भंडार होने के बावजूद परिवहन लागत, स्थानीय आपूर्ति में बाधा, जमाखोरी और मौसमी मांग के कारण खुदरा कीमतें बढ़ सकती हैं। इसलिए सरकार को त्योहारों से पहले आपूर्ति की समीक्षा, जमाखोरी पर निगरानी और आवश्यकता पड़ने पर खुले बाजार में पर्याप्त अनाज उपलब्ध कराने पर ध्यान देना चाहिए।
भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन 2026: निर्यात के नए अवसर
भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन 2026 (बीआईआरसी) का दूसरा संस्करण 23, 24 और 25 अक्टूबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किए जाने की जानकारी दी गई है। भारतीय चावल निर्यातक महासंघ के आयोजन में अंतरराष्ट्रीय खरीदारों, निर्यातकों, आयातकों, नीति-निर्माताओं तथा बैंकिंग, बीमा, पैकेजिंग और परिवहन क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।
सम्मेलन में नौ ज्ञान-सत्रों, कारोबारी बैठकों और चावल व्यापार के भविष्य से संबंधित चर्चाओं का कार्यक्रम बताया गया है। यह भारतीय निर्यातकों के लिए नए बाजार तलाशने, भुगतान जोखिम कम करने, गुणवत्ता मानकों को समझने और विदेशी खरीदारों के साथ दीर्घकालिक कारोबारी संबंध बनाने का अवसर हो सकता है।
लेकिन इस अवसर का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब निर्यात बढ़ाने के साथ घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतों और किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखा जाए। उत्पादन, भंडारण, परिवहन और वितरण व्यवस्था को मजबूत किए बिना केवल निर्यात बढ़ाना खाद्य महंगाई की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता।
चीनी की कीमतों पर भी दबाव: इथेनॉल नीति और गन्ना उत्पादन महत्वपूर्ण
चीनी की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। मीडिया में सामने आई जानकारी के अनुसार, 16 अक्टूबर को घोषित वर्ष 2026-27 की इथेनॉल आपूर्ति व्यवस्था में गन्ने के रस, सिरप और बी-हैवी शीरे से चीनी आधारित इथेनॉल बनाने के लिए चीनी के इस्तेमाल पर रोक संबंधी प्रावधान का उल्लेख किया गया, ताकि घरेलू चीनी आपूर्ति सुरक्षित रखी जा सके।
कमजोर वर्षा के कारण महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ना उत्पादन पर दबाव तथा त्योहारों के दौरान मांग में बढ़ोतरी कीमतों को प्रभावित कर सकती है। इससे स्पष्ट होता है कि खाद्य महंगाई पर नियंत्रण के लिए केवल सरकारी भंडार के आंकड़े पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए उत्पादन की स्थिति, वितरण व्यवस्था, बाजार की निगरानी और समय पर सरकारी हस्तक्षेप भी आवश्यक हैं।
ट्रंप का रूस संबंधी टैरिफ यू-टर्न: भारत को संभावित राहत, लेकिन अनिश्चितता बरकरार
अमेरिका की व्यापार और प्रतिबंध संबंधी नीतियां भी वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं। 17 अक्टूबर 2026 को रूस से संबंधित प्रतिबंधों और प्रस्तावित दंडात्मक शुल्कों के क्रियान्वयन में छूट दिए जाने की खबर को वैश्विक बाजार के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा गया।
रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की संभावना तथा इससे पहले 500 प्रतिशत तक शुल्क की चर्चा ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता बढ़ाई थी। अमेरिकी प्रशासन द्वारा राष्ट्रीय हितों का हवाला देते हुए कुछ उपायों को फिलहाल रोकने की खबर को भारत के लिए संभावित राहत के रूप में देखा जा सकता है।
हालांकि, इसे सभी व्यापारिक शुल्कों की स्थायी समाप्ति नहीं समझना चाहिए। भविष्य में अमेरिकी नीति में बदलाव की संभावना बनी रह सकती है।
भारत के लिए इसका पहला संभावित लाभ रूसी तेल खरीद पर अतिरिक्त अमेरिकी दंड का तत्काल जोखिम कम होना है। यदि भारत को प्रतिस्पर्धात्मक दरों पर कच्चा तेल मिलता रहता है, तो इससे तेल आयात बिल, चालू खाते और घरेलू महंगाई पर दबाव कम हो सकता है। रुपये को अप्रत्यक्ष समर्थन मिल सकता है और तेल विपणन, परिवहन, विमानन तथा कुछ विनिर्माण कंपनियों को राहत मिल सकती है।
वैश्विक स्तर पर अतिरिक्त व्यापारिक तनाव टलने से ऊर्जा बाजार को भी कुछ स्थिरता मिल सकती है। लेकिन पश्चिम एशिया का संघर्ष, तेल आपूर्ति में व्यवधान, डॉलर की मजबूती और भविष्य में अमेरिकी नीतियों में संभावित बदलाव फिर अस्थिरता पैदा कर सकते हैं।
इसलिए भारतीय शेयर बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए केवल अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान से अधिक महत्वपूर्ण यह होगा कि कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेश का प्रवाह और कंपनियों की कमाई किस दिशा में आगे बढ़ती हैं।
रिलायंस जियो का प्रस्तावित मेगा आईपीओ: भारतीय पूंजी बाजार के लिए बड़ी परीक्षा
भारतीय पूंजी बाजार के लिए अक्टूबर 2026 का एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम रिलायंस समूह की डिजिटल और दूरसंचार इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स का प्रस्तावित आईपीओ है।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलने और 23 अक्टूबर 2026 को बंद होने की जानकारी दी गई है। इसका आकार लगभग 37,700 करोड़ रुपये बताया गया, जबकि रॉयटर्स की रिपोर्ट में लगभग 3.2 अरब डॉलर जुटाने का लक्ष्य दर्ज किया गया। दोनों आंकड़े अलग-अलग रिपोर्टिंग और मूल्यांकन आधारों से जुड़े हो सकते हैं।
यह आईपीओ भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गमों में शामिल होने की संभावना रखता है। इसके माध्यम से डिजिटल अर्थव्यवस्था, दूरसंचार क्षेत्र और भारतीय पूंजी बाजार में निवेशकों की रुचि का आकलन किया जा सकेगा।
इतने बड़े आईपीओ से बाजार में नई पूंजी जुटाने की क्षमता का प्रदर्शन हो सकता है। हालांकि, निवेशकों के पास सीमित पूंजी होने के कारण निर्गम में बड़ी रकम लगने से कुछ समय के लिए दूसरे शेयरों की मांग प्रभावित होने की आशंका भी रहती है।
अंततः इसका प्रभाव निर्गम की कीमत, निवेशकों की प्रतिक्रिया, बाजार की परिस्थितियों और लिस्टिंग के बाद कंपनी के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। इसलिए केवल आईपीओ का आकार ही उसकी सफलता का अंतिम पैमाना नहीं हो सकता।
स्टारलिंक बनाम जियो: उपग्रह इंटरनेट से नई आर्थिक प्रतिस्पर्धा
इसी बीच एलन मस्क की स्टारलिंक भारत में उपग्रह आधारित हाई-स्पीड इंटरनेट सेवा शुरू करने की तैयारी को लेकर चर्चा में है। कंपनी की ओर से भारतीय नेटवर्क, गेटवे और आवश्यक बुनियादी ढांचे की तैयारी तथा नियामकीय अनुमतियों से संबंधित जानकारी सामने आने की बात कही गई है।
रिलायंस की ओर से यह रुख सामने आया है कि भारत में कारोबार करने वाली सभी कंपनियों को समान सरकारी नियमों और मंजूरी प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए। रिपोर्टों के अनुसार, रिलायंस की अपनी उपग्रह इंटरनेट सेवाएं भी आवश्यक मंजूरियों की प्रतीक्षा में हैं।
इस प्रतिस्पर्धा का व्यापक आर्थिक महत्व है। उपग्रह इंटरनेट ग्रामीण क्षेत्रों, दूरदराज के उद्योगों, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और डिजिटल कारोबार को लाभ पहुंचा सकता है। बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी से उन क्षेत्रों में भी डिजिटल सेवाओं का विस्तार संभव है, जहां पारंपरिक नेटवर्क पहुंचाने में कठिनाई होती है।
दूसरी ओर, जियो और अन्य दूरसंचार कंपनियों के लिए नई प्रतिस्पर्धा कीमतों, तकनीकी नवाचार और निवेश रणनीतियों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, नियामकीय मंजूरी, सेवा शुरू होने की तारीख और वास्तविक व्यावसायिक उपलब्धता को अलग-अलग समझना आवश्यक है।
बजट 2027 के सामने सबसे बड़ी चुनौती: निवेश, महंगाई और राजस्व में संतुलन
समग्र रूप से देखें तो भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने कई चुनौतियां एक साथ मौजूद हैं। विदेशी निवेशकों की बिकवाली से पूंजी बाजार पर दबाव है, खाद्य महंगाई आम उपभोक्ता की चिंता बढ़ा सकती है, जबकि वैश्विक व्यापारिक तनाव और ऊर्जा बाजार की अनिश्चितता आर्थिक नीतियों को प्रभावित कर सकती है।
दूसरी ओर, जियो का प्रस्तावित आईपीओ, डिजिटल सेवाओं का विस्तार, भारतीय चावल निर्यात की संभावनाएं और वैश्विक बाजारों में भारत की बढ़ती भूमिका आर्थिक विकास के नए अवसर भी प्रस्तुत करती हैं।
बजट 2027 में सरकार के सामने कुछ महत्वपूर्ण प्राथमिकताएं होनी चाहिए। पहली, कर नीति को स्पष्ट और पूर्वानुमान योग्य बनाना, ताकि निवेशकों का भरोसा मजबूत हो। दूसरी, एलटीसीजी और एसटीटी की समीक्षा करते समय राजस्व संग्रह तथा बाजार की प्रतिस्पर्धात्मकता के बीच संतुलन स्थापित करना। तीसरी, खाद्य महंगाई को नियंत्रित करने के लिए उत्पादन, भंडारण और वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाना। चौथी, निर्यात और घरेलू उपलब्धता के बीच संतुलन बनाए रखना। पांचवीं, डिजिटल बुनियादी ढांचे और तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करना।
यह भी समझना होगा कि विदेशी निवेश की वापसी केवल कर राहत पर निर्भर नहीं करती। आर्थिक विकास की गति, कंपनियों की कमाई, रुपये की स्थिरता, वैश्विक ब्याज दरें और निवेशकों का दीर्घकालिक भरोसा समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
निष्कर्ष: भारतीय अर्थव्यवस्था किस करवट बैठेगी?
वैश्विक अर्थव्यवस्था में जारी उथल-पुथल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती भी है और अवसर भी। विदेशी निवेशकों की बिकवाली, खाद्य महंगाई, अमेरिकी टैरिफ नीति और वैश्विक ऊर्जा बाजार की अनिश्चितता के बीच भारत को ऐसी आर्थिक रणनीति की जरूरत है, जो निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के साथ आम जनता के हितों की भी रक्षा करे।
बजट 2027 में एलटीसीजी और एसटीटी पर किसी संभावित राहत को लेकर अभी अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। लेकिन स्पष्ट कर नीति, दीर्घकालिक निवेश को प्रोत्साहन, खाद्य महंगाई पर नियंत्रण और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के लिए अनुकूल वातावरण भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
मेरे विचार में भारत की आर्थिक सफलता का वास्तविक पैमाना केवल शेयर बाजार की तेजी या बड़े आईपीओ से जुटाई गई पूंजी नहीं होना चाहिए। रोजगार के अवसरों में वृद्धि, किसानों की आय, आम उपभोक्ता की क्रयशक्ति, उद्योगों का विस्तार और निवेशकों का स्थायी भरोसा ही आर्थिक विकास की वास्तविक कसौटी होंगे।
लेखक परिचय: एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया, महाराष्ट्र — विशेषज्ञ स्तंभकार, साहित्यकार, अंतरराष्ट्रीय लेखक, चिंतक, कवि, संगीत माध्यमा तथा सीए (एटीसी)।

Editor CP pandey

Recent Posts

आधी रात मंदिर मार्ग पर मची चीख-पुकार, बेकाबू ट्रक ने उजाड़ दिए कई परिवार

शीतला माता मंदिर मार्ग पर भीषण हादसा: 13 की मौत से पसरा मातम, 40 घायल…

14 minutes ago

मेक्सिको के तट पर पलटी नौका, 11 लोग लापता! 16 की बची जान, शार्क के हमले से घायल मिला यात्री; समुद्र में तेज हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन

AI निर्मित बाजा कैलिफोर्निया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) मेक्सिको के बाजा कैलिफोर्निया तट के पास…

25 minutes ago

कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल में मची चीख-पुकार! भगदड़ में 17 लोगों की मौत, 25 घायल; एक की हालत गंभीर

AI निर्मित आयोजकों समेत 7 गिरफ्तार कोलकाता (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) पश्चिम बंगाल की राजधानी…

35 minutes ago

सुबह-सुबह सड़कों पर उतरी पुलिस, सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा

मॉर्निंग वॉकर्स और बुजुर्गों से किया संवाद, एंटी रोमियो टीम ने बालिकाओं को हेल्पलाइन नंबरों…

2 hours ago

थाली में अन्न की बर्बादी पर लगे लगाम, तभी मिटेगी भूख की समस्या

अन्न का सम्मान, किसान की मेहनत का सम्मान है; भोजन की बर्बादी रोकना सरकार के…

3 hours ago

रिश्ते में प्यार और नजदीकी बनाए रखने के लिए छोड़ दें ये 6 आदतें, वरना बढ़ सकती है दूरियां

लेखक: अमरेश रावत। राष्ट्र की परम्परा रिश्ता चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, उसे…

3 hours ago