मऊ (राष्ट्र की परम्परा)जनपद में पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने के उद्देश्य से कलेक्ट्रेट सभागार में जिला वृक्षारोपण समिति, पर्यावरण समिति, आर्द्र भूमि समिति एवं जिला गंगा समिति की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी प्रवीण मिश्र ने करते हुए सभी विभागों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पौधरोपण से संबंधित तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए। शासन स्तर से वर्ष 2026-27 के लिए जनपद को कुल 30 लाख 51 हजार 481 पौधरोपण का लक्ष्य दिया गया है, जिसे पूरा करने के लिए विभागवार जिम्मेदारियां तय की गई हैं।
बैठक में वन अधिकारी पीके पांडे ने जानकारी देते हुए बताया कि जनपद में सर्वाधिक पौधरोपण की जिम्मेदारी वन विभाग को सौंपी गई है। वन विभाग को 15 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया है। इसके अतिरिक्त कृषि विभाग को 1 लाख 81 हजार, उद्यान विभाग को 1 लाख 13 हजार, ग्राम्य विकास विभाग को 8 लाख 8 हजार 821, पंचायती राज विभाग को 93 हजार तथा राजस्व विभाग को 76 हजार पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अन्य विभागों को भी सहयोगात्मक भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए हैं।
भूमि चिन्हांकन और गड्ढा खुदाई कार्य पर विशेष जोर
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि पौधरोपण अभियान को सफल बनाने के लिए समय से भूमि चिन्हांकन और गड्ढों की खुदाई का कार्य पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि चिन्हित भूमि का विवरण जल्द से जल्द विभागीय पोर्टल पर अपलोड किया जाए ताकि पौधरोपण कार्य में किसी प्रकार की देरी न हो।
वन विभाग द्वारा यह भी बताया गया कि वर्ष 2020 से वर्ष 2023 के बीच किए गए पौधरोपण कार्यों का सत्यापन शासन द्वारा गठित विशेष टीम करेगी। जिलाधिकारी ने इस पर गंभीरता दिखाते हुए सभी विभागों को वर्ष 2024-25 में लगाए गए पौधों का सत्यापन रिपोर्ट तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
नदियों में मूर्ति विसर्जन से बढ़ रहा प्रदूषण
बैठक में जिला गंगा समिति की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने धार्मिक अवसरों पर नदियों में मूर्ति विसर्जन से बढ़ रहे जल प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मूर्तियों के निर्माण में प्लास्टर ऑफ पेरिस, रासायनिक रंग और वार्निश जैसे अविघटनीय पदार्थों का उपयोग किया जाता है, जो नदी के जल को प्रदूषित कर रहे हैं।
जिलाधिकारी ने बताया कि इन पदार्थों के कारण जल में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) और केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (COD) का स्तर बढ़ जाता है। इससे जल में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है, जो जलीय जीव-जंतुओं और मछलियों के लिए गंभीर खतरा बन जाती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस समस्या पर नियंत्रण नहीं किया गया तो नदी की पारिस्थितिकी तंत्र पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।
नदियों को बचाने के लिए कृत्रिम कुंडों में विसर्जन का निर्देश
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आगामी धार्मिक आयोजनों के दौरान मूर्तियों का विसर्जन प्राकृतिक जल स्रोतों के बजाय निर्धारित स्थलों और कृत्रिम कुंडों में कराया जाए। उन्होंने विशेष रूप से तमसा नदी और घाघरा नदी सहित अन्य नदियों में प्रदूषण रोकने के लिए जनजागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि धार्मिक आयोजनों से पहले ही स्थानीय स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं ताकि लोग पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी समझ सकें और निर्धारित स्थानों पर ही विसर्जन करें।
जलीय जीवन और मानव स्वास्थ्य पर पड़ता है असर
बैठक में बताया गया कि नदी में विसर्जित मूर्तियों से निकलने वाले रासायनिक तत्व पानी को विषैला बना देते हैं। इससे न केवल जलीय जीवों की मृत्यु दर बढ़ती है बल्कि यह जल मानव उपयोग के लिए भी असुरक्षित हो जाता है। भारी धातुओं और रासायनिक अवशेषों से जल गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिससे पेयजल स्रोतों पर भी खतरा उत्पन्न हो सकता है।
जिलाधिकारी ने कहा कि स्वच्छ नदियां पर्यावरण संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं और इसे सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन के साथ-साथ आम जनता की भागीदारी भी जरूरी है।
सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी विवेक कुमार श्रीवास्तव, जिला कृषि अधिकारी सोम प्रकाश गुप्ता, डीसी मनरेगा राजीव कुमार, जिला पंचायत राज अधिकारी कुमार अमरेंद्र सहित अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए पौधरोपण लक्ष्य को शत-प्रतिशत पूरा करने तथा नदी प्रदूषण रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
पर्यावरण संरक्षण के लिए जनभागीदारी जरूरी
बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने कहा कि वृक्षारोपण और जल संरक्षण दोनों ही पर्यावरण संतुलन के लिए बेहद जरूरी हैं। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण की समस्या और गंभीर हो सकती है। उन्होंने जनपदवासियों से अपील की कि वे पौधरोपण अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लें और नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।
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