गुरू पूर्णिमा के शुभ अवसर पर
सभी गुरुओं को सादर प्रणाम है,
दादा-दादी, माता-पिता, बड़ों को
जीना सिखलाने के लिये नमन है।
अपने शिक्षकों सहित उस प्रत्येक
व्यक्ति का आजीवन ऋणी रहूँगा,
मैं उस जन जन को गुरू मानता हूँ,
जिनसे अब तक सीखता रहता हूँ।
आज के युग में जो तकनीकी बातें,
छोटे छोटे बच्चे बड़ों को बताते हैं,
अपना ज्ञान जो औरों में बाँटते हैं,
बड़े हों या छोटे सभी गुरु होते हैं।
प्राय: ग़रीब व्यक्ति सहृदय होते हैं,
पशु, पक्षी, पेंड़, पौधों, इंसानों की
मदद को हर समय तत्पर रहते हैं,
सारे समाज को वह शिक्षा देते हैं।
ऐसे सभी गुरु ईश्वर समान होते हैं,
व ईश्वर तो गुरूवों का गुरु होता है,
आदित्य सबको नमन हृदय से मेरा
गुरू पूर्णिमा के शुभ अवसर पर है।
कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
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