गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में “योग बंधन” नामक एक भव्य अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य योग के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना था।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने अपने उद्घाटन भाषण में कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जिन्होंने पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों, विशेष रूप से योग को वैश्विक मंचों पर बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रोत्साहित किया है।
मुख्य वक्ता प्रो. विजय चाहल ने “बेहतर स्वास्थ्य और जीवनशैली के लिए योग” विषय पर सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि योग केवल शारीरिक तंदुरुस्ती का साधन नहीं है, बल्कि सामाजिक एकता और मानसिक शांति का सेतु भी है।
कार्यक्रम में साउथ पैसिफिक विश्वविद्यालय ने सहभागिता की, जो कुक द्वीप, फिजी, किरिबाती, मार्शल द्वीप, नाउरु, नियू, समोआ, सोलोमन द्वीप, टोकेलाउ, टोंगा, तुवालु और वानुआतु जैसे 12 देशों में कार्यरत एक क्षेत्रीय विश्वविद्यालय है।
कार्यक्रम में लगभग 50 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें से अधिकांश योग प्रशिक्षक, छात्र और शिक्षक थे। कार्यक्रम में कई अंतरराष्ट्रीय अतिथियों की उपस्थिति रही। जिनमें प्रमुख रूप से योग शिक्षिका रंभा महाराज, सल्विया पुर्डे (न्यूज़ीलैंड), प्रो. आर.के. प्रजापति (यूएसपी), मेघनाथ (भारतीय उच्चायोग, सुवा फिजी), जेफ सैमुअल, डेनिस सेन, लितिया वेइताटा, एसिनाते, एली वाका, और जालेसी।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि “योग बंधन केवल एक कार्यक्रम नहीं है, यह एकता, कल्याण और साझा वैश्विक मूल्यों का संदेश है।” यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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