संत कबीर नगर(राष्ट्र की परम्परा)। स्वयं को परिस्थितियों के अनुकूल बना लेने वाली नन्हीं सी गौरैया दो दशक पहले तक घर के मुड़ेरों पर, खेत खलिहानों में हर तरफ झुंड में उड़ती देखी जाती थी। लेकिन अब यह विलुप्ति के कगार पर पहुंच गई है। यह एक संकटग्रस्त और दुर्लभ पक्षी की श्रेणी में आ गई है। भारत के अलावा विश्व के कई हिस्सों में भी इनकी संख्या काफी कम रह गई है। इनके भोजन तथा पानी की कमी, पक्के मकान बनने से घोसलों के लिए उचित स्थानों का आभाव, पेड़-पौधे का कटान, बदलती जीवनशैली, मोबाइल रेडिएशन का दुष्प्रभाव, तापमान में लगातार होती बढ़ोतरी इत्यादि कई ऐसे प्रमुख कारण हैं। जो गौरैया की विलुप्ति का कारण बन रहे हैं।
खेतों में कीटनाशकों के बढ़ते प्रयोग से भी इनके अस्तित्व पर काफी बुरा असर पड़ रहा है। प्रकृति संतुलन तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी है कि हम पक्षियों के लिए वातावरण को उनके प्रति अनुकूल बनाने में सहायक बनें। बहरहाल, प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में हमारी सहभागी रही गौरेया के संरक्षण के लिए आज लोगों में बड़े स्तर पर जागरूकता पैदा किए जाने की सख्त जरूरत है। यही वक्त का तकाजा भी है।
सुनीता कुमारी पूर्णियां बिहार भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में समय की गणना केवल दिनों…
बहन की प्रताड़ना से आहत होकर युवती ने लगाई थी फांसी, पुलिस ने की कार्रवाई…
कूटरचना कर लोगों को बनाता था शिकार, पुलिस ने दबोचा आरोपी गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)गुलरिहा थाना…
एनडीआरएफ की टीम का सर्च ऑपरेशन जारी, गांव में पसरा मातम मौके पर पहुंचे जनप्रतिनिधि…
सिकंदरपुर /बलिया (राष्ट्र क़ी परम्परा ) आगामी मोहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में…
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर द्वारा सत्र 2025-26 के विभिन्न स्नातकोत्तर…