सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के पकड़ी वन रेंज व दक्षिण चौक का मामला
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। सोहगी बरवां वन्य जीव प्रभाग जीव जन्तुओं व वन्य जीवों की सुरक्षा के मामले में हमेशा सुर्खियों में रहता है। जहां सरकार ने वन्य जीवों को पानी पीने के लिए जंगल मे स्थित तालाब व जगह- जगह पानी का सीमेंटेड टैंक बनवाया है। इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी में वर्षो पूर्व वना पानी का टैंक सुख गया है।वही हाल तालाबों का है और वन्य जीवों को पीने के लिए पानी नसीब नही हो पा रहा है। सरकार द्वारा बनाया गया टैंक बेमतलब साबित हो रहा है,जिसे लेकर पकड़ी रेंज व दक्षिण चौक रेंज के जिम्मेदार मौन धारण किये हुए है। प्राप्त समाचार के अनुसार इन दिनों भीषण पड़ रही गर्मी व तिलमिलाती धूप से वन्य जीव बूंद -बूंद पानी के लिए जंगल मे तरस रहे हैं। सरकार द्वारा वर्षो पूर्व पकड़ी व दक्षिणी चौक वन रेंज क्षेत्र के जंगलों में स्थित तालाब व बनाया गया। पानी टैंक पूर्ण रूप से सुख चुका है। जब भी वन्य जीवों को प्यास लग रही है तो वह टैंक पर पानी पीने जा रहे है तो टैंक कों सुखा पाकर मजबूर होकर वन्य जीव जंगल से बाहर निकले के लिए मजबूर हो गए है। वे वन्य जीव अपनी छुधा को भरने के लिए गांवों की तरफ अपना रुख कर लिए हैं।और तमाम लोगो पर अटैक कर घायल कर दे रहे हैं। जिसके जिम्मेदार अपनी कुंभकरणी नींद में सोते नजर आ रहे है। इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी व तिल मिलाती धूप में वन विभाग के जिम्मेदारों द्वारा पानी का जंगल मे समुचित व्यवस्था नही किया गया तो वह वन्य जीव गांवों में निकल कर ग्रामीणों पर हमला कर मौत के घाट उतार सकते है। सरकार की सोच पर पानी फिरता नजर आ रहा है। सरकार का करोड़ों रुपये पानी के तरह बहता नजर आ रहा है। वही जंगल में तालाबों को बेहतर बनाने के लिए भी उचित प्रबंध किया गया है, लेकिन सुखे तालाबों और सूखे टैंक के अगल बगल न ही हैंड पम्प है और न ही बोरिंग नजर आ रहा है। इससे साबित हो रहा है कि सरकार द्वारा वन्य जीवों के लिए की गई पानी की व्यवस्था पर पानी फिरता नजर आ रहा है,और किसी तरह कार्य को पूरा कर सरकारी धन का बन्दर बाट कर दिखा दिया गया है।जो सिर्फ दिखावा है।इस सम्बंध में प्रभागीय वनाधिकारी महराजगंज निरंजन सुर्वे से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि मामला मेरे संज्ञान में है।अति शीघ्र बने पानी टैंक के बगल में बोरिंग व हैंड पम्प की व्यवस्था की जा रही है। जिससे टैंक सूखने पर उसमे पानी भरा जा सके ।और वन्य जीवों को प्यास लगने पर पानी पीकर अपनी छुधा को भर सकें।
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