ज्योतिष शास्त्र में खरमास को एक विशेष और संवेदनशील काल माना गया है। यह समय सूर्य और गुरु की विशिष्ट स्थिति से बनता है, जिसे ज्योतिषीय भाषा में गुर्वादित्य योग कहा जाता है। इस अवधि में मांगलिक कार्यों पर रोक लगाई जाती है, जबकि धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों को विशेष रूप से शुभ माना जाता है। खरमास को केवल वर्जनाओं का काल नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और आत्मचिंतन का अवसर भी माना जाता है।
सूर्य–गुरु की युति से कैसे बनता है खरमास
ज्योतिष के अनुसार, सभी राशियों का संचालन ग्रहों द्वारा होता है। सूर्य सिंह राशि के स्वामी हैं, जबकि गुरु धनु और मीन राशि के अधिपति माने जाते हैं। खरमास तब आरंभ होता है जब सूर्य गुरु की राशि (धनु या मीन) में प्रवेश करते हैं या गुरु सूर्य की राशि सिंह में स्थित होते हैं। यही स्थिति गुर्वादित्य योग कहलाती है।
सूर्य लगभग एक माह में राशि परिवर्तन करते हैं, जबकि गुरु एक राशि में 12 से 13 माह तक रहते हैं। इसी कारण वर्ष में सामान्यतः दो बार खरमास आता है, प्रत्येक बार लगभग एक महीने की अवधि का।
खरमास में शुभ कार्य क्यों होते हैं वर्जित
सूर्य को अग्नि तत्व प्रधान और ज्योतिष में पाप ग्रह की श्रेणी में रखा गया है, जबकि गुरु को सबसे सौम्य और शुभ ग्रह माना जाता है। जब ये दोनों एक-दूसरे की राशि में होते हैं, तो उनके सकारात्मक प्रभाव में कमी आ जाती है। इसी कारण विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण, नया व्यवसाय या बड़े निवेश जैसे शुभ कार्य इस काल में वर्जित माने जाते हैं।
मान्यता है कि इस समय ग्रहों की ऊर्जा सांसारिक कार्यों के लिए अनुकूल नहीं रहती।
खरमास में क्या करना माना जाता है शुभ
हालांकि मांगलिक कार्यों पर रोक होती है, लेकिन खरमास में दान-पुण्य, पूजा-पाठ, जप-तप, व्रत, तीर्थ यात्रा और जरूरत की वस्तुओं की खरीद अत्यंत फलदायी मानी जाती है। यह समय आत्मविश्लेषण, संयम और आध्यात्मिक उन्नति के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि इस काल में किया गया दान कई गुना फल देता है।
क्षेत्र विशेष की मान्यता और विशेष स्थल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुर्वादित्य कुयोग का प्रभाव मुख्य रूप से गंगा और गोदावरी नदियों के मध्य क्षेत्र में अधिक माना जाता है। इस क्षेत्र के बाहर कुछ स्थानों पर शुभ कार्य किए जा सकते हैं। प्रयागराज का प्रह्लाद घाट विशेष रूप से इस उद्देश्य के लिए प्रसिद्ध है, जहां परंपरागत रूप से लोग खरमास में भी संस्कार संपन्न कराते रहे हैं।
खरमास में जन्मे जातकों का स्वभाव
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, खरमास में जन्म लेने वाले व्यक्ति स्वभाव से थोड़े कठोर हो सकते हैं, लेकिन वे बुद्धिमान, विवेकी और धन संचय में सक्षम होते हैं। ऐसे जातक साधु-संतों और धर्म के प्रति सम्मान रखते हैं तथा अपने ज्ञान से दूसरों का मार्गदर्शन करने की क्षमता रखते हैं।
खरमास केवल निषेध का समय नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित करने और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध होने का अवसर है। सही जानकारी और समझ के साथ यदि इस काल का सदुपयोग किया जाए, तो यह आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
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