संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय शिक्षण मंडल गुरुवार को व्यास पूजन कार्यक्रम का आयोजन प्रभा देवी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खलीलाबाद में किया गया। यह आयोजन मंडल के गोरक्ष प्रांत की संत कबीर नगर इकाई की ओर से सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हीरालाल रामनिवास स्नातकोत्तर कालेज के बीएड विभागाध्यक्ष डॉ. पूर्णेश नारायण सिंह ने संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय शिक्षा पद्धति केवल ज्ञान नहीं, चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण का आधार है। गुरु को ‘व्यास’ कहे जाने का तात्पर्य यही है कि वह ज्ञान और संस्कार का वाहक होता है। हमें अपने शास्त्रों, ग्रंथों और परंपराओं के मर्म को समझते हुए नई पीढ़ी को उससे जोड़ना होगा। विशिष्ट अतिथि के तौर पर डॉ. योगेश पाल, प्रवक्ता, इतिहास, गौर इंटर कॉलेज ने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा भारत की सबसे प्राचीन और गौरवशाली परंपरा रही है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ. प्रमोद कुमार त्रिपाठी ने भारतीय शिक्षण मंडल द्वारा किए जा रहे शैक्षिक और सांस्कृतिक कार्यों की सराहना करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा, गुरु-शिष्य संबंध तथा शिक्षा में भारतीय दृष्टिकोण की महत्ता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में जिले के शिक्षाविद, कालेज के प्राध्यापक प्राध्यापिकाएं एवं छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रही।
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