बाल विवाह के दुष्परिणामों से रूबरू हुए ग्राम मुखिया

गाँव को बाल विवाह से मुक्त बनाने की ली शपथ

बहराइच(राष्ट्र की परम्परा)l जरवल ब्लाक सभागार में आयोजित बाल विवाह लड़का व लड़की दोनों पर असर डालता है l लेकिन इसका प्रभाव लड़कियों पर अधिक पड़ता है। जिन लड़कियों की शादी कम उम्र में हो जाती है उनके स्कूल से निकल जाने की संभावना बढ़ जाती हैl अधूरी शिक्षा और कौशल ज्ञान न होने के कारण उनके पास अपने परिवार की गरीबी दूर करने और नौकरियाँ पाने की क्षमता भी कम हो जाती है। कम उम्र में शादी करने से जीवन काल में बच्चों की संख्या भी ज्यादा होती है। इससे घरेलू खर्च का बोझ बढ़ता है। साथ ही उन्हें कम उम्र में गर्भावस्था और प्रसव के दौरान गंभीर समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है। यह बातें जरवल ब्लाक सभागार में आयोजित बाल विवाह के विरुद्ध अभियान पर अभिमुखीकरण कार्यक्रम में अपर विकास अधिकारी राजेश सिंह ने कही। स्वास्थ्य विभाग,पंचायती राज विभाग व उम्मीद परियोजना के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित ग्राम प्रधानों को संबोधित करते हुए l उन्होंने कहा बाल विवाह एक कलंक है इसके विरुद्ध आवाज घर-घर तक पहुंचाने में सभी ग्राम प्रधान अपनी भूमिका निभाएँ। उपस्थित ग्राम प्रधानों ने बताया उन्होंने अपने गाँव में बाल विवाह से सम्बन्धित दीवार लेखन कराना शुरू कर दिया है। इस मौके पर बाल विवाह के विरुद्ध अभियान के लिए शपथ लिया गया और इससे सम्बन्धित पाँच पोस्टर का अनावरण भी किया गया। मोबियस फाउंडेशन के राज्य प्रतिनिधि प्रभात कुमार ने कहा मोबियस फाउंडेशन के सहयोग से पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया तथा सेव अ मदर जरवल ब्लाक में उम्मीद परियोजना चला रही है । जिसका उददेश्य जनसमुदाय में बाल विवाह की रोकथाम व परिवार नियोजन संबंधी जागरूकता एवं स्वीकार्यता को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया प्रत्येक राजस्व गाँव में ग्राम स्वास्थ्य,स्वच्छता एवं पोषण समिति (वी.एच.एस.एन.सी.) के माध्यम से गाँव स्तर पर दीवार लेखन व जन-जागरूकता कार्यक्रम करने के प्रयास किए जा रहे हैं । इसके अलावा ग्राम प्रधानों के सहयोग से समुदाय के साथ बैठक,सेल्फी, वीडियों संदेश आदि के माध्यम से जन जागरूकता कार्य किया जाना है। महिला एवं बाल कल्याण विभाग की संरक्षण अधिकारी सेविका मौर्या ने बताया बाल विवाह को रोकने के लिए बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 है। इसके अंतर्गत दण्ड का प्रावधान भी है। इस अधिनियम के अंतर्गत 21 वर्ष से कम आयु का लड़का और 18 वर्ष से कम आयु की लड़की के विवाह को बाल-विवाह के रुप में परिभाषित किया गया है। यदि कहीं पर बाल विवाह हो रहा हो तो इसके लिए हेल्पलाइन नम्बर 112 तथा 1098 पर सूचना दिया जा सकता है। अधिनियम का उद्देश्य बाल विवाह की रोकथाम,बाल विवाह में शामिल बच्चों की सुरक्षा और अपराधियों पर मुकदमा चलाना है। इस मौके पर आजीविका मिशन से जितेन्द्र सिंह ,शैलेन्द्र यादव, पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ़ इण्डिया से बलबीर सिंह,अभिषेक पाठक व सेव अ मदर से बिंदु और अवधेश के अलावा ग्राम विकास अधिकारी मौजूद रहे।

Editor CP pandey

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