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वीरांगना उदा देवी: अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ नारी शक्ति की प्रतीक

1857 की क्रांति की अमर नायिका जिसे इतिहास ने कम लिखा

पुनीत मिश्र

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास केवल राजाओं और सेनाओं के संघर्ष से नहीं बना, बल्कि उन असंख्य वीर-वीरांगनाओं की दृढ़ता और बलिदान से भी गढ़ा गया है, जिन्होंने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया। ऐसी ही एक महान, लेकिन इतिहास में कम चर्चित क्रांतिकारी थीं वीरांगना उदा देवी पासी, जिनकी वीरता 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में अद्भुत रूप से उजागर हुई।
वीरांगना उदा देवी अवध क्षेत्र की साहसी महिला थीं। उन्होंने अंग्रेजी शासन की ज्यादतियों के खिलाफ संगठित प्रतिरोध में सक्रिय भूमिका निभाई। वे बेगम हज़रत महल के नेतृत्व में कार्यरत क्रांतिकारी दल से जुड़ीं और अपने पति मक्खन पासी के साथ मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष में कूद पड़ीं।
1857 के संग्राम के दौरान उदा देवी ने महिलाओं का एक वीर दस्ता तैयार किया, जिसे “दालखोरिन दल” कहा गया। यह दल बिबिघर से लेकर लखनऊ के कई मोर्चों पर अंग्रेजी सेना को कड़ा मुकाबला देता रहा। उदा देवी की युद्ध कौशल और दूरदर्शिता का सर्वोच्च प्रदर्शन सिकंदर बाग़ के युद्ध में देखने को मिला। कहा जाता है कि उन्होंने पेड़ पर चढ़कर अंग्रेज सैनिकों पर सटीक निशाना साधा और अकेले ही कई सिपाहियों को मौत के घाट उतार दिया। अंग्रेज सेना इस अचानक हुए हमले से विस्मित रह गई थी।
इसी युद्ध के दौरान उदा देवी ने वीरगति प्राप्त की। युद्ध समाप्ति के बाद जब अंग्रेज अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण कराया, तो उन्हें यह जानकर गहरा आश्चर्य हुआ कि उनके अनेक सैनिकों को मारने वाली योद्धा एक महिला थी। उनका यह अद्भुत साहस देखकर विरोधी सेनानायक भी सम्मान प्रकट करने के लिए विवश हो उठे।
उदा देवी का बलिदान स्वतंत्रता संग्राम को नई ऊर्जा देने वाला साबित हुआ। उन्होंने यह प्रमाणित किया कि भारतीय नारी किसी भी विपरीत परिस्थिति में असीम साहस और क्षमता का परिचय देने में समर्थ है।
आज उदा देवी की स्मृति लखनऊ के सिकंदर बाग़ सहित अनेक आयोजनों और समाजिक स्मरणों के माध्यम से जीवित है, लेकिन राष्ट्रव्यापी स्तर पर उनकी वीरता का प्रचार-प्रसार अभी भी आवश्यक है। उनकी गाथा आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देती है कि स्वतंत्रता किसी एक वर्ग या समुदाय की लड़ाई नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा आकांक्षा है और इस संघर्ष में महिलाओं की भूमिका सदैव अग्रिम पंक्ति में रही है।
वीरांगना उदा देवी का जीवन साहस, निष्ठा और राष्ट्रभक्ति की अमिट ज्योति है, जो इतिहास के पन्नों में भले धुंधली दिखाई दे, पर भारतीय जन-मन में सदैव उज्ज्वल बनी रहेगी।

rkpnews@desk

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