US-Iran Relations: बढ़ते तनाव के बीच बातचीत को तैयार अमेरिका, ट्रंप-खामेनेई मुलाकात के संकेत

वॉशिंगटन/तेहरान (राष्ट्र की परम्परा)। US-Iran Relations: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिकी नौसेना की बढ़ती मौजूदगी के बीच अमेरिका ने साफ किया है कि वह अब भी ईरान के साथ बातचीत के जरिए समाधान चाहता है। अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio ने कहा कि यदि अवसर मिला तो राष्ट्रपति Donald Trump ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei से मिलने के लिए तैयार हैं।

“दुश्मन से बात करना कमजोरी नहीं”

रुबियो ने कहा कि ट्रंप का मानना है कि बड़े विवादों को सुलझाने के लिए सीधे संवाद जरूरी है। किसी विरोधी नेता से मुलाकात करना रियायत या झुकना नहीं होता, बल्कि समाधान की दिशा में कदम होता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर आयतुल्लाह अली खामेनेई बातचीत की इच्छा जताते हैं, तो ट्रंप मिलने को तैयार रहेंगे। इसका अर्थ यह नहीं होगा कि अमेरिका ईरान की नीतियों से सहमत है, बल्कि संवाद के माध्यम से रास्ता निकालने की कोशिश होगी।

सैन्य मौजूदगी बढ़ी, लेकिन दरवाजे खुले

रुबियो का बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाई है। उनका कहना है कि यह कदम एहतियातन उठाया गया है, ताकि ईरान की ओर से संभावित खतरे को रोका जा सके।

उन्होंने दोहराया कि अमेरिका किसी भी हालत में ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं देगा। उनका कहना है कि इससे क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा को गंभीर खतरा होगा।
इसके बावजूद, ट्रंप प्रशासन बातचीत और समझौते को प्राथमिकता दे रहा है।

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संभावित वार्ता में कौन होगा शामिल?

रुबियो ने संकेत दिया कि संभावित वार्ता में अमेरिकी विशेष दूत Steve Witkoff और Jared Kushner भी शामिल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति की पहली पसंद हमेशा कूटनीतिक समाधान रही है।

चीन और सहयोगी देशों पर भी टिप्पणी

रुबियो ने यह भी कहा कि सहयोगी देशों का चीन के साथ संवाद बढ़ाना सामान्य कूटनीतिक प्रक्रिया है। उन्होंने कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer और जर्मनी के चांसलर Friedrich Merz के चीन दौरे को सामान्य बताया।

उन्होंने कहा कि बड़ी शक्तियों के बीच संवाद टकराव से बचने के लिए जरूरी है। ट्रंप पहले भी चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping से मिल चुके हैं और भविष्य में फिर बीजिंग जा सकते हैं।

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Karan Pandey

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