बगराम (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। अफगानिस्तान का बगराम एयरबेस एक बार फिर अमेरिका की रणनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गया है। यह वही सैन्य अड्डा है, जिसे साल 2001 में तालिबान के खिलाफ लड़ाई और काबुल पर नियंत्रण पाने के लिए अमेरिका ने अपना मुख्य ठिकाना बनाया था। करीब दो दशक तक बगराम एयरबेस अमेरिकी सेना की गतिविधियों का गढ़ बना रहा। साल 2021 में जब अमेरिका ने अफगानिस्तान से अपनी वापसी का फैसला किया, तब यह एयरबेस तालिबान के कब्जे में चला गया। इसके बाद से यह अड्डा तालिबान की निगरानी और नियंत्रण में है। हालांकि अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं हैं कि अमेरिका की नजरें दोबारा इस अहम सैन्य ठिकाने पर टिक गई हैं। काबुल से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित यह एयरबेस न सिर्फ अफगानिस्तान बल्कि पूरे मध्य एशिया में अमेरिका की सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा रहा है। यहां से अमेरिकी सेना ने तालिबान और अल-कायदा के खिलाफ कई बड़े अभियान चलाए थे। विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों, खासकर मध्य एशिया में बदलते समीकरण और आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों के चलते अमेरिका फिर से बगराम एयरबेस पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है। हालांकि तालिबान के कब्जे के चलते ऐसा करना अमेरिका के लिए आसान नहीं होगा। अफगानिस्तान की स्थिति पर नज़र रखने वाले विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में बगराम एयरबेस को लेकर अमेरिका और तालिबान के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है। यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि अगर अमेरिका यहां अपनी सक्रियता बढ़ाने में सफल होता है, तो मध्य एशिया में उसकी सैन्य मौजूदगी एक बार फिर से मजबूत हो सकती है।
दिसंबर 2025 की परीक्षा में सौ से अधिक विद्यार्थियों को सफलता, हिंदी विषय से सर्वाधिक…
सिकंदरपुर/बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। सिकंदरपुर-बेल्थरा मार्ग पर शुक्रवार को हुई दो अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं ने…
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयूजीयू) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सशक्त पहचान…
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।विकासखंड परतावल के ग्राम पिपरपाती तिवारी में उस समय उत्सव जैसा माहौल…
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। फरेंदा थाना क्षेत्र के ग्राम सभा बैकुंठपुर में शुक्रवार सुबह उस…
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। शिक्षा के साथ संस्कृति और मनोरंजन के समन्वय की…