नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। यूपीएससी के अध्यक्ष अजय कुमार ने घोषणा की है कि आयोग अब राज्य लोक सेवा आयोगों के साथ मिलकर काम करेगा, ताकि चयन प्रक्रिया अधिक समावेशी, पारदर्शी और जिम्मेदार बन सके। इसके तहत श्रेष्ठ कार्य-प्रणालियों का आदान-प्रदान और फीडबैक तंत्र को मजबूत किया जाएगा।
अजय कुमार ने कहा कि यूपीएससी के लिए तीन मुख्य लक्ष्य होंगे — समावेशिता, डिजिटल बदलाव और नई पीढ़ी के अभ्यर्थियों से जुड़ाव। उन्होंने यह भी बताया कि अब यूपीएससी में आवेदन करने वाले उम्मीदवारों का बड़ा हिस्सा टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहा है।
यूपीएससी शताब्दी वर्ष में डिजिटल बदलाव और नवाचार
यूपीएससी शताब्दी वर्ष के मौके पर आयोग ने डिजिटल जुड़ाव को मुख्य फोकस बनाया है। अध्यक्ष अजय कुमार ने कहा कि यह वर्ष न केवल यूपीएससी की विरासत का उत्सव है, बल्कि संस्थागत सुधार और आउटरीच का अवसर भी है।
इस दिशा में आयोग ने “मेरा यूपीएससी इंटरव्यू” नामक डिजिटल पोर्टल लॉन्च किया है, जहाँ सेवारत और सेवानिवृत्त अधिकारी अपने अनुभव साझा कर सकते हैं। आयोग नए लोगो और डिजिटल पहचानों के माध्यम से उम्मीदवारों के साथ अपने जुड़ाव को मजबूत करेगा।
समावेशी और आधुनिक चयन प्रक्रिया
अजय कुमार ने कहा कि यूपीएससी का ध्यान केवल परीक्षा प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह युवाओं के साथ मजबूत संबंध बनाने और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर होगा।
इसके तहत आयोग राज्य लोक सेवा आयोगों के साथ मिलकर सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करेगा और फीडबैक तंत्र को और मजबूत करेगा।
भविष्य की तैयारी: यूपीएससी शताब्दी वर्ष
यूपीएससी सचिव शशि रंजन कुमार ने कहा कि शताब्दी वर्ष संस्थान की विरासत का सम्मान करने के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयारी का अवसर है।
1 अक्टूबर, 1926 को स्थापित यूपीएससी ने एक शताब्दी से भारत की योग्यता-आधारित सिविल सेवा प्रणाली को नेतृत्व प्रदान किया है।
अब शताब्दी वर्ष में आयोग नई चुनौतियों को अपनाते हुए समावेशी, डिजिटल और पारदर्शी चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करेगा।
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