UPPWD में कम रेट वाली निविदाओं पर सख्ती, कार्य गुणवत्ता और समयबद्धता के लिए नया कॉन्सेप्ट नोट जारी
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश में सड़कों, पुलों और अन्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एवं समयसीमा को लेकर अब लोक निर्माण विभाग (UPPWD) ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। विभाग ने अत्यधिक कम दरों पर प्राप्त होने वाली निविदाओं (टेंडर) पर नियंत्रण के लिए एक नया कॉन्सेप्ट नोट जारी किया है, जिसका उद्देश्य अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा पर लगाम लगाना और केवल सक्षम व अनुभवी ठेकेदारों को ही कार्य सौंपना है।
बीते कुछ वर्षों में यह देखा गया कि कई ठेकेदार अनुमानित लागत से बेहद कम दरों पर टेंडर हासिल कर लेते हैं, लेकिन बाद में वही कार्य गुणवत्ता, समय और विवादों का कारण बनते हैं। इसी पृष्ठभूमि में UPPWD ने यह नई प्रक्रिया प्रस्तावित की है।
क्या है नया कॉन्सेप्ट नोट?
UPPWD द्वारा जारी इस कॉन्सेप्ट नोट में साफ किया गया है कि 10% से अधिक कम दरों पर मिलने वाली निविदाओं को अब सामान्य प्रक्रिया से नहीं निपटाया जाएगा। ऐसे मामलों में अतिरिक्त सुरक्षा, गुणवत्ता जांच और सख्त दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
विभाग का मानना है कि अव्यवहारिक रूप से कम दरें अंततः सरकारी धन की बर्बादी और जनता को खराब निर्माण का नुकसान पहुंचाती हैं।
5 करोड़ रुपये से कम लागत वाले कार्यों के लिए प्रावधान
🔹 अतिरिक्त परफॉर्मेंस सिक्योरिटी
यदि कोई निविदा अनुमानित लागत से 10% से अधिक कम दर पर आती है, तो ठेकेदार को अनुमानित लागत और निविदा लागत के अंतर के आधार पर अतिरिक्त परफॉर्मेंस सिक्योरिटी जमा करनी होगी।
🔹 गुणवत्ता की विशेष जांच
15% से अधिक कम दर होने पर ठेकेदार के पहले से चल रहे किसी कार्य का चयन कर उसकी गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी। यह जांच किसी अन्य सर्किल के वरिष्ठ अभियंता द्वारा की जाएगी।
खराब गुणवत्ता मिलने पर,कारण बताओ नोटिस,2 वर्ष के लिए डिबार (ब्लैकलिस्ट),संबंधित निविदा निरस्त,पुनः टेंडर जारी
🔹 समान दर पर निर्णय
यदि दो या अधिक निविदादाताओं की दरें समान (15% तक कम) हों, तो प्रहरी सॉफ्टवेयर के माध्यम से अधिकतम बिड कैपेसिटी वाले ठेकेदार को प्राथमिकता मिलेगी।
5 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले कार्यों के लिए सख्त नियम
🔹 दो कार्यों की गुणवत्ता जांच
ऐसे टेंडर जिनमें दरें 15% से अधिक कम हों, वहां ठेकेदार के दो अन्य कार्यों की जांच कराई जाएगी। इसमें मुख्यालय से नामित मुख्य अभियंता भी शामिल होंगे।
🔹 अन्य विभागों के कार्यों की अनिवार्य जानकारी
ठेकेदार को यह बताना होगा कि उसके पास किसी अन्य विभाग में 5 करोड़ से अधिक लागत का कोई कार्य चल रहा है या पिछले दो वर्षों में पूरा हुआ है या नहीं।ऐसी स्थिति में संबंधित विभाग के मुख्य अभियंता स्तर से गुणवत्ता प्रमाण पत्र अनिवार्य होगा।
जानकारी छिपाने पर,अनुबंध निरस्त,सामान्य व अतिरिक्त परफॉर्मेंस सिक्योरिटी जब्त,2 वर्ष तक डिबार
🔹 समयसीमा उल्लंघन पर अपात्रता
यदि अन्य विभागों के कार्य समय पर पूरे नहीं हुए हैं या बिना स्वीकृत समयवृद्धि के लंबित हैं, तो ठेकेदार को अपात्र घोषित किया जाएगा।
नई व्यवस्था से क्या होंगे लाभ?
अव्यवहारिक और अवास्तविक कम दरों पर रोक,ठेकेदारों की जवाबदेही तय,समयबद्ध और मानक अनुरूप निर्माण,सरकारी धन का बेहतर उपयोग,सड़कों और पुलों की गुणवत्ता में सुधार,विभाग का स्पष्ट संदेश
UPPWD के अधिकारियों का कहना है कि यह कॉन्सेप्ट नोट किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि बेहतर निर्माण संस्कृति के लिए है। जो ठेकेदार ईमानदारी और गुणवत्ता के साथ काम कर रहे हैं, उनके लिए यह व्यवस्था फायदेमंद साबित होगी।
बदलाव असुविधा से शुरू होता है, लेकिन यही बदलाव आगे चलकर विकास की मजबूत नींव बनता है।
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