UP Hardoi News में एक बेहद महत्वपूर्ण और सख्त न्यायिक फैसला सामने आया है, जिसने साफ कर दिया है कि कानून के सामने नाबालिग की सुरक्षा सर्वोपरि है। हरदोई जिले में एक युवक को नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में 10 साल की सजा सुनाई गई है, जबकि वह बाद में उसी पीड़िता से शादी कर चुका था और दोनों के दो बच्चे भी हैं।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि नाबालिग से दुष्कर्म का अपराध शादी करके खत्म नहीं किया जा सकता। यह फैसला समाज के लिए एक मजबूत संदेश है कि कानून के नियमों से कोई भी ऊपर नहीं है।
यह मामला वर्ष 2017 का है, जब हरदोई जिले के माधौगंज थाना क्षेत्र की एक किशोरी ने गांव के ही युवक पर गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत के अनुसार, आरोपी रात के समय दीवार फांदकर घर में घुसा और छेड़छाड़ व दुष्कर्म का प्रयास किया।
शोर मचाने पर परिवार के लोग मौके पर पहुंचे, जिसके बाद आरोपी फरार हो गया। इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई और जांच शुरू हुई।
UP Hardoi News के अनुसार, पुलिस ने आरोपी के खिलाफ POCSO Act और अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया। जांच के दौरान पीड़िता के बयान के आधार पर दुष्कर्म की धारा भी जोड़ी गई।
अभियोजन पक्ष ने अदालत में 4 गवाह और 9 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए, जिनके आधार पर कोर्ट ने आरोपी को दोषी पाया।
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इस केस में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि कोर्ट ने स्पष्ट किया:
“नाबालिग की सहमति कानून की नजर में शून्य होती है।”
यानी यदि कोई संबंध सहमति से भी बना हो, लेकिन लड़की की उम्र 18 साल से कम है, तो वह दुष्कर्म ही माना जाएगा।
UP Hardoi News में यह बिंदु सबसे अहम है क्योंकि कई मामलों में लोग “सहमति” का तर्क देते हैं, जो कानून में मान्य नहीं है।
कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि घटना के समय पीड़िता की उम्र केवल 13 साल 4 महीने थी। यह उम्र POCSO Act के तहत पूरी तरह से नाबालिग की श्रेणी में आती है।
इसी आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा और ₹5000 का जुर्माना लगाया।
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इस मामले में आरोपी की ओर से यह तर्क दिया गया कि उसने पीड़िता से शादी कर ली है और दोनों के दो बच्चे भी हैं, इसलिए उसे रिहा किया जाए।
लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा:
• शादी अपराध को खत्म नहीं करती
• नाबालिग से संबंध बनाना गंभीर अपराध है
• कानून में इस तरह के मामलों में कोई छूट नहीं दी जा सकती
UP Hardoi News का यह फैसला समाज में एक बड़ा संदेश देता है कि “शादी” किसी अपराध का समाधान नहीं है।
इस फैसले के जरिए अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया:
• नाबालिगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है
• POCSO Act के तहत सख्त कार्रवाई होगी
• सहमति, प्रेम प्रसंग या शादी—कोई भी दुष्कर्म को सही नहीं ठहरा सकता
UP Hardoi News के इस केस ने यह भी दिखाया कि न्याय में देर हो सकती है, लेकिन न्याय मिलता जरूर है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार:
• POCSO Act में सजा बहुत सख्त होती है
• नाबालिग मामलों में कोर्ट बेहद संवेदनशील रहता है
• ऐसे मामलों में समझौता या शादी कोई कानूनी बचाव नहीं है
यह फैसला भविष्य में आने वाले मामलों के लिए एक मिसाल बन सकता है।
इस पूरे मामले से समाज को कुछ महत्वपूर्ण सीख मिलती है:
• नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता जरूरी है
• कानून के नियमों को समझना जरूरी है
• प्रेम संबंध या सामाजिक दबाव कानून से ऊपर नहीं है
UP Hardoi News का यह मामला बताता है कि कानून हर स्थिति में बच्चों के अधिकारों की रक्षा करता है।
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