संतुलन की पतली रस्सी पर बजट 2026: आर्थिक अनुशासन, विकास और मध्यम वर्ग की उम्मीदें
1 फरवरी 2026 को संसद में पेश केंद्रीय बजट 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया कि सरकार आर्थिक अनुशासन और जनता की आकांक्षाओं के बीच एक संतुलित राह चुन रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने भाषण में स्थिरता, निरंतरता और दीर्घकालिक विकास पर जोर दिया। यह Budget 2026 किसी लोकलुभावन घोषणा का दस्तावेज नहीं, बल्कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की यथार्थवादी रूपरेखा है।
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पिछले वर्ष की 6.8% जीडीपी वृद्धि के बावजूद वैश्विक मंदी, अमेरिका-चीन व्यापार तनाव और घरेलू मुद्रास्फीति जैसी चुनौतियां मौजूद हैं। ऐसे में केंद्रीय बजट 2026 का संतुलित दृष्टिकोण उल्लेखनीय है।
राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3% तय किया गया है, जो पूर्व लक्ष्य से कम है। यह वित्तीय अनुशासन का मजबूत संकेत है। पूंजीगत व्यय 12.2 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है, जो बुनियादी ढांचे, डिजिटल तकनीक, टियर-2 व टियर-3 शहरों और PPP मॉडल पर केंद्रित है। संपत्ति मुद्रीकरण से 10 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।
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राजमार्गों के लिए 50,000 किमी, रेलवे के लिए 2.5 लाख करोड़, और राज्यों को 50 वर्षीय ब्याज-मुक्त 1.5 लाख करोड़ का प्रावधान भविष्य के निवेश को मजबूत करता है। सवाल यही है—क्या यह निवेश गांव और कस्बों तक रोजगार पहुंचा पाएगा?
मध्यम वर्ग, जो देश की जीडीपी का लगभग 40% योगदान देता है, उसे Budget 2026 Highlights में ठोस राहत मिली। पुरानी कर व्यवस्था में मानक कटौती 1 लाख रुपये, नई कर व्यवस्था में 5 लाख तक शून्य कर, शिक्षा ऋण पर TCS समाप्त, किराया TDS सीमा 6 लाख, दो स्व-व्यवहृत घरों पर कर राहत और ITR समयसीमा 4 वर्ष—ये सभी कदम भरोसे की राजनीति को दर्शाते हैं। कर कानूनों को सरल बनाना अनुपालन को आसान करेगा, बशर्ते जमीनी अमल प्रभावी हो।
कृषि बजट 2026 में पीएम धन-धान्य योजना का विस्तार, फसल विविधीकरण, सिंचाई-भंडारण, किसान क्रेडिट कार्ड सीमा में वृद्धि, मत्स्य पालन और ग्रामीण क्रेडिट स्कोरिंग जैसे प्रावधान शामिल हैं। मनरेगा और एसएचजी के जरिए ग्रामीण आय को सहारा मिलेगा। हरियाणा जैसे राज्यों में यह पहल गेहूं-धान चक्र से बाहर निकलने में मददगार होगी।
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महिला सशक्तीकरण के लिए लक्ष्मी वंदना योजना का विस्तार, स्वरोजगार ऋण पर गारंटी हटाना और पंचायतों के लिए 10,000 करोड़ का प्रावधान महत्वपूर्ण है। Budget 2026 में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को मजबूती देने की स्पष्ट मंशा दिखती है।
युवा और शिक्षा के लिए 1.35 लाख करोड़, 50 नए IIT व मेडिकल कॉलेज, स्किल इंडिया के लिए 2 लाख करोड़, और स्टार्टअप फंड 50,000 करोड़—ये घोषणाएं रोजगार-केंद्रित विकास की दिशा तय करती हैं। चुनौती यही है कि शिक्षा-उद्योग की खाई कैसे भरी जाए।
तकनीक और हरित ऊर्जा पर विशेष जोर—AI केंद्र, 5G, डिजिटल इंडिया (1 लाख करोड़) और स्वच्छ ऊर्जा (5 लाख करोड़)—भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे ले जाने का प्रयास है।
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अंततः Budget 2026 गरीब, किसान, महिला और युवा पर केंद्रित 10 प्रमुख क्षेत्रों का रोडमैप है। दिशा स्पष्ट है—अब क्रियान्वयन की गति और ईमानदारी ही इसकी सफलता तय करेगी।
🧾 लेखिका का परिचय
डॉ. प्रियंका सौरभ
पीएचडी (राजनीति विज्ञान) | कवयित्री | सामाजिक चिंतक | स्तंभकार
उब्बा भवन, आर्यनगर, हिसार (हरियाणा) – 125005
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