पीएम- उषा योजना के तहत विश्वविद्यालय में बनेगा आनलाइन परीक्षा केन्द्र

शोध एवं विकास के लिए चार मंजिला भवन

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता सुनिश्चयन प्रकोष्ठ की एक बैठक 15 अप्रैल, 2024 को सम्पन्न हुई।
बैठक में समिति के बाह्य सदस्यों एसके अग्रवाल, अध्यक्ष, चेम्बर आफ इंडस्ट्रीज, गोरखपुर, डॉ० शिव शरण दास, पूर्व आचार्य, रसायन विज्ञान विभाग, मानधाता सिंह, अध्यक्ष युवा चेतना समिति एवं प्रोफेसर ओपी सिंह, प्राचार्य, दिग्विजय नाथ पीजी कालेज, गोरखपुर को कुलपति एवं आईक्यूएसी के सदस्यों ने सम्मानित किया।
बैठक को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो पूनम टंडन ने विश्वविद्यालय की वर्तमान उपलब्धियों एवं भविष्य की योजनाओं के सम्बन्ध में अवगत कराते हुए कहा कि पीएम- उषा योजना के अन्तर्गत स्वीकृत धनराशि से संवाद भवन, दीक्षा भवन का अनुरक्षण कार्य कराया जाएगा। इसके साथ ही आनलाइन परीक्षा केन्द्र, शोध एवं विकास के लिये एक चार मंजिला भवन बनाया जायेगा।
कुलपति ने विभिन्न विश्वस्तरीय रैकिंग में प्राप्त रैक से अवगत कराने के साथ विश्वविद्यालय एवं विभिन्न संस्थानो के साथ हुये एमओयू के बारे में चर्चा की।
कुलपति ने बताया कि पुरातन छात्र के सहयोग से अमृता कला वीथिका का अनुरक्षण कराया जायेगा। इसके साथ ही विश्वविद्यालय बास्केट बाल टीम को पुरातन छात्र द्वारा पूर्ण सहयोग ट्रेनिंग, किट इत्यादि प्रदान किया जाएगा।
बैठक में प्रो सुधीर कुमार श्रीवास्तव, निदेशक, आईक्यूएसी ने आईक्यूएसी के महत्व, आवश्यकता, अनिवार्यता एवं उसके गठन के बारे में विस्तृत रूप से सदस्यों को अवगत कराया तथा सत्र 2022-23 में आईक्यूएसी द्वारा किये गये कार्यों से प्रोफेसर गौर हरि बेहरा द्वारा अवगत कराया। आई० क्यू०ए०सी० के बाह्य सदस्यों ने विश्वविद्यालय को विश्व स्तर पर पहचान बनाये जाने और समाज के प्रति उत्तरदायित्य को सकुशल निर्वाहन करने के लिये सुझाव दिये।
चेम्बर आफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष एसके अग्रवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसे पाठ्यक्रम बनाये जाय जिनके छात्र औद्योगिक संस्थानों में जाकर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि बाइओडिग्रेडबल प्लास्टिक को कैसे दुबारा उपयोग करें इस पर शोध किया जाय। प्रदुषण को नियंत्रित करने के लिये ग्रीन आडिट नियमित रूप से करायी जाय तथा बायोवेस्ट का उपयोग उद्योग में किये जाय।
बैठक में प्रो शिव शरण दास, पूर्व आचार्य, रसायन विज्ञान विभाग ने कहा कि विश्वविद्यालय के निर्माण का एक मास्टर प्लान होना चाहिए यदि सम्भव हो तो वास्तुशास्त्रीय पूर्ण कालिक रूप से नियुक्त करें। विश्वविद्यालय में भवनों को उर्ध्वाधर वृद्धि की जाय तथा पुरातन छात्रों को विभिन्न प्रकार के विभागीय स्तर पर कार्यक्रमों को आयोजित करते हुये उन्हें जोड़ा जाय।
प्रो. दास ने कहा कि विश्वविद्यालय के सुन्दरता को और बेहतर किये जाने के दृष्टिकोण से पौधा रोपण, बागिचे इत्यादि बनाये जाय।
प्रो. ओपी सिंह, प्राचार्य, दिग्विजय नाथ पीजी कालेज, गोरखपुर ने कहा कि परीक्षा एवं पाठ्यक्रमों के निर्माण में महाविद्यालयों की भागदारी सुनिश्चित किया जाय।
बैठक में मांधाता सिंह, अध्यक्ष, युवा चेतना समिति ने कहा कि विश्वविद्यालय में पुरातन छात्र परिषद का गठन नये सिरे से किये जाये जिसमें अध्यक्ष किसी बाह्य पुरातन छात्र को बनाये जाय।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. स्मिता पालीवाल एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. महेन्द्र प्रताप सिंह ने किया। कार्यक्रम में डॉ. प्रीति गुप्ता, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. मणीन्द्र कुमार, डॉ. विरेन्द्र कुमार मधुकर, डॉ. कुसुम रावत, वित्त अधिकारी, परीक्षा नियन्त्रक एवं कुलसचिव उपस्थित रहें।

rkpNavneet Mishra

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