लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जनपद के लोक निर्माण विभाग (PWD) ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने न केवल जनपद की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में भूचाल ला दिया बल्कि आम जनता और कार्यकर्ताओं में भी भारी भ्रम की स्थिति उत्पन्न कर दी। विभाग द्वारा एक ही दिन में अलग-अलग तारीखों और भिन्न भाषा-भाव वाले दो पत्र जारी किए जाने से मामला और गंभीर हो गया है।
सूत्रों के अनुसार, यह विवाद तब शुरू हुआ जब विभाग की ओर से सोशल मीडिया पर दो अलग-अलग पत्र तेजी से वायरल होने लगे। इन पत्रों में तिथियों और आशय में अंतर देखा गया, जिससे स्थानीय स्तर पर चर्चा, परिचर्चा और अखबारों की सुर्खियों का बड़ा विषय बन गया। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिरकार एक ही विभाग एक ही दिन में अलग-अलग आदेश कैसे जारी कर सकता है।
जानकारों का कहना है कि PWD विभाग की इस चूक ने “जनपद के उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव को टकरा” दिया है, जिससे स्थिति भयंकर विस्फोट जैसी हो गई है। यदि विभाग ने सोशल मीडिया पर भ्रम पैदा करने वाले दोनों पत्र नहीं डाले होते तो हालात इतने गंभीर न बनते।
जनपद के प्रबुद्ध नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि यह प्रकरण विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने मांग की है कि उच्च स्तर पर जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आखिरकार यह चूक महज लापरवाही थी या फिर किसी और कारण से दो पत्र जारी किए गए।
जनता और कार्यकर्ताओं में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर सही पत्र कौन-सा है और विभाग का वास्तविक निर्णय क्या है। इस कारण कार्यों की दिशा और भविष्य की योजनाओं पर भी अनिश्चितता छा गई है।
जनपद में यह पहली बार नहीं है जब विभागीय पत्रों को लेकर विवाद सामने आया हो, लेकिन इस बार मामला व्यापक स्तर पर सुर्खियों में है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यदि समय रहते इस भ्रम को दूर नहीं किया गया तो इसका असर सरकारी योजनाओं और जनता के विश्वास दोनों पर पड़ सकता है।
देवरिया PWD विभाग का यह “दो पत्रों का विवाद” अब महज प्रशासनिक भूल भर नहीं रहा, बल्कि जनपद की प्रतिष्ठा और पारदर्शिता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या सामने आता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।
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