रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरो चटकाय।
टूटे पे फिर ना जुरे, जुरे गाँठ परी जाय ॥
रहीम दास कहते थे कि प्रेम का
नाता अत्यंत नाज़ुक होता है,
प्रेम की डोर को झटका देकर तोड़ना
कभी भी उचित नही होता है,
यह धागा टूट जाता है, तो फिर इसे
मिलाना कठिन होता है,
यदि टूटे हुए धागे मिल भी जायँ तो
बीच में गाँठ पड़ जाती है॥
किरणें चाहे सूर्य की हों,या आशा की,
चहुँ ओर का अंधकार मिट जाता है,
सूर्योदय होने पर निशातिमिर छट
कर आशा का संचार बढ़ा जाता है।
सूरज की किरणें तिमिर मिटा सारे
जग को प्रकाशित करती रहती हैं,
तो आशा रूपी किरने भी जीवन में
उम्मीदों के चिराग़ जलाने आती हैं।
मित्रता, समझदारी, आत्मनिर्भरता,
संवाद, विश्वास और ईमानदारी से
पारिवारिक एवं सामाजिक सम्बंध
सुंदरता के साथ ही निभाये जाते हैं।
प्रेम और भ्रम मिलते जुलते शब्द हैं,
सबको एक रखने की ताकत प्रेम में
व सबको एक दूसरे से अलग करने
व अलग रखने की ताकत भ्रम में है।
इसलिए हम कभी भी मन मे भ्रम
न पालें और प्रेम से मुस्कुराते रहें,
प्रेम वह अद्भुत गुण है जो दुश्मन
की भी अक्सर दुश्मनी भुला देते हैं।
प्रेम और सम्मान का दरवाज़ा तो
आदित्य इतना छोटा व तंग होता है,
कि उसमें प्रवेश मिलने से ठीक पहले,
सिर को अक्सर झुकाना ही पड़ता है।
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