समाज को बड़ा संदेश देने के लिए कविता से बेहतर माध्यम कोई नहीं है: कुलपति

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। ‘समाज को बड़ा संदेश देने के लिए कविता से बेहतर माध्यम कोई नहीं है।’
उक्त बातें दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कही। उन्होनें कहा कि कविताएं भावनाओं की अभिव्यक्ति है। प्रो. टंडन मंगलवार को विश्वविद्यालय के दीक्षा भवन में 43वें दीक्षांत सप्ताह के अन्तर्गत आयोजित काव्य गोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित कर रही थीं।
काव्य गोष्ठी में प्रसिद्ध कवियों के साथ विश्वविद्यालय के कई होनहार कवि छात्रों को भी कविता पढ़ने का अवसर का दिया गया।
कवि गोष्ठी का प्रारंभ सबसे नन्ही कवि कनिष्का की देशभक्ति कविता से हुई।
कवयित्री चारू सिंह ने गोष्ठी की शुरुआत सरस्वती गीत ‘शारदे माँ मुझे ऐसा वर दे मेरा हर दिन तू त्योहार कर दें’ से की। युवा कवियों की श्रृंखला में मोनिका ने संस्कृत में काव्य पाठ, महमूद रजा ने नात विधा की प्रस्तुति की। साथ ही संस्कृत विभाग की अपर्णा, प्राणी विज्ञान की नंदिनी सिंह, स्नातक के छात्र दीपक और सिद्धेश्वर ओझा, विधि विभाग के लक्ष्मी सागर, हिंदी विभाग के अवनीश मौर्या, पत्रकारिता के छात्र सुधांशु सिंह, शोध छात्र हर्षित ने कविता पाठ किया।
मुख्य कवियों में वसीम अजहर ने मेरा हिंदुस्तान नज्म से सभागार में सभी को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। आकृति विज्ञा अर्पण ने अपनी नई कविता ‘सुनो बसंती हील उतारों’ से महिलाओं को आगे बढ़ने के लिये प्रेरित किया। डॉ. चारू शीला सिंह ने श्रृंगार की कविता से महफ़िल लूट लिया।
प्रख्यात शायर सरवत जमाल ने अपनी उर्दू शायरी, नुसरत अतीक ने पारिवारिक कविता, चेतना पांडेय ने ‘इस युग ने कहा औरत को देवी’ का काव्य पाठ किया।
सुभाष यादव ने अपनी विश्व प्रसिद्ध कविता ‘केहू केतनो दुलारी लेकिन माई ना होइ’ नामक कविता से सभी को मातृ भावनाओं से भाव-विभोर कर दिया।
जय प्रकाश नायक ने ‘एक जैसे रहे एक जैसे रहे और में तो घबरा गया है नदी देखकर’ नामक की कविता का पाठन किया।
गोष्ठी की अंतिम कविता ‘मेरी कविताओं पर ताली न बजाओ’ देवेंद्र आर्य के द्वारा सुनाई गई ।
इसके पूर्व कार्यक्रम के स्वागत वक्तव्य में उक्त काव्य गोष्ठी के संयोजक प्रो. राजेश मल्ल ने कहा कि इस संगोष्ठी में विश्वविद्यालय के सभी विभागों के छात्रों ने रूचि दिखाई जो हमारे विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय है।
कार्यक्रम के अंत में उर्दू विभाग के प्रो. साजिद हुसैन ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर कुलसचिव प्रो. शांतनु रस्तोगी, प्रो.नंदिता सिंह प्रो. दीपक प्रकाश त्यागी, प्रो. अनिल कुमार राय, प्रो. बिमलेश कुमार मिश्र, प्रो. कमलेश कुमार गुप्त, डॉ. अमोद राय, प्रो. गौरहरि बेहरा, प्रो.सुनीता मुर्मू, डॉ.साजिद हुसैन, डॉ.सूर्यकांत त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।

rkpNavneet Mishra

Recent Posts

दिनदहाड़े अधिवक्ता की हत्या से दहला बाराबंकी

बाराबंकी में अधिवक्ता शोएब किदवई (बॉबी) की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या, कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल…

3 hours ago

आइए जानते है किन राशियों की चमकेगी किस्मत

14 फरवरी 2026 का राशिफल: जानें किस राशि को होगा बड़ा लाभ, किसे बरतनी होगी…

3 hours ago

शनिवार का पंचांग: प्रदोष व्रत और सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग

🗓 हिंदू पंचांग विवरण | 14 February 2026वार: शनिवारतिथि: फाल्गुन कृष्ण पक्ष द्वादशीद्वादशी समाप्त: 04:01…

3 hours ago

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन की टीम ने बुलडोजर कार्रवाई के मामले में पीड़ित परिवार से की मुलाकात

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के सलेमपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत नगर पंचायत सलेमपुर के हरैया…

4 hours ago

यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 को लेकर प्रशासन की व्यापक तैयारी

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)। प्रस्तावित हाईस्कूल और इंटरमीडिएट (यूपी बोर्ड) परीक्षा 2026 को सकुशल, नकलविहीन और…

4 hours ago

UPPWD टेंडर नियमों में बड़ा बदलाव, अनुभवहीन ठेकेदारों पर लगेगा ब्रेक

UPPWD में कम रेट वाली निविदाओं पर सख्ती, कार्य गुणवत्ता और समयबद्धता के लिए नया…

4 hours ago