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शिव पुत्री अशोक सुंदरी की कथा

आलेख-

शिव नाम के जयकारे पुरे देश-दुनिया में लगाई जाती है , शिव पुत्र गणेश जी के पुजा के बिना कोई भी पुजा शुरू नही होती। शिव जी के पुत्र गणेश जी और कातिर्केय जी को सभी जानते हैं आज शिव जी की पुत्री अशोक सुंदरी के बारे में जानते हैं।
भगवान शिव की एक पुत्री का नाम अशोक सुंदरी था। हालांकि महादेव की और भी पुत्रियां थीं जिन्हें नागकन्या के नाम से जाना जाता है, इनके नाम हैं – जया, विषहर, शामिलबारी, देव और दोतलि।
अशोक सुंदरी को भगवान शिव और पार्वती की पुत्री बताया गया इसीलिए वही गणेशजी की बहन है।पद्मपुराण में भगवान शिव और देवी पार्वती की बेटी अशोक सुंदरी का उल्लेख किया गया है। अशोक सुंदरी की पूजा सोमवार के दिन की जाती है। माना जाता है कि आर्थिक स्थिति ठीक न होने पर अशोक सुंदरी की पूजा करनी चाहिए, इससे जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। अशोक सुंदरी के जन्म के बारे में कहा जाता है एक दिन माता पार्वती भगवान शिव के साथ घूमने के लिए वन गई हुई थी। वहां पर माता पार्वती ने कल्पवृक्ष को देखा। कल्पवृक्ष के पास जाकर माता पार्वती ने अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए एक ऐसी सखी को मांगा, जिससे वे अपने मन की सारी बातें कह सके और एक मां की तरह वासल्य भी दे सके। कल्पवृक्ष को मनोका में ना पूर्ति करने वाला वृक्ष कहा जाता है। कल्पवृक्ष ने माता पार्वती की बात सुनी और उन्हें एक पुत्री प्रदान की। पार्वती और महादेव के जीवन में इस पुत्री के आने से अपार प्रसन्नता का संचार हुआ और देखने में यह बालिका अत्यधिक सुंदर थी, इसलिए इस कन्या का नाम अशोक सुंदरी रखा गया।
एक बार की बात है ,अशोक सुंदरी अपनी दासियों के साथ नंदनवन में विचरण कर रही थीं तभी वहां हुंड नामक राक्षस का आया। जो अशोक सुंदरी की सुंदरता से मोहित हो गया और उसने अशोक सुंदरी के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा।
लेकिन अशोक सुंदरी ने अपने वरदान और विवाह के बारे में बताया कि उनका विवाह नहुष से ही होगा। यह सुनकर राक्षस ने कहा कि वह नहुष को मार डालेगा। ऐसा सुनकर अशोक सुंदरी ने राक्षस को शाप दिया कि जा दुष्ट तेरी मृत्यु नहुष के हाथों ही होगी। यह सुनकर वह राक्षस घबरा गया। तब उसने राजकुमार नहुष का अपहरण कर लिया। लेकिन नहुष को राक्षस हुंड की एक दासी ने बचा लिया। नहुष महर्षि वशिष्ठ के आश्रम में बड़े हुए और उन्होंने हुंड का वध किया। इसके बाद नहुष तथा अशोक सुंदरी का विवाह हुआ हुआ। विवाह के बाद अशोक सुंदरी ने ययाति जैसे वीर पुत्र तथा सौ रुपवती कन्याओं को जन्म दिया। ययाति भारत के चक्रवर्ती सम्राटों में से एक थे और उन्हीं के पांच पुत्रों से संपूर्ण भारत पर राज किया था। उनके पांच पुत्रों का नाम था- 1.पुरु, 2.यदु, 3.तुर्वस, 4.अनु और 5.द्रुहु। इन्हें वेदों में पंचनंद कहा गया है। सोमवार को महादेव की पुत्री अशोक सुंदरी की पूजा पूजा भगवान शिव और पार्वती के साथ की जाती है। सोमवार का दिन महादेव का माना जाता है, इसलिए महादेव ने अपनी पुत्री को वरदान दिया था कि उनकी पूजा भी सोमवार को की जाएगी। शिवलिंग में जिस स्थान से बहकर जल निकलता है, उस स्थान को अशोक सुंदरी का स्थान कहा जाता है।

सुनीता कुमारी
(बिहार)

Karan Pandey

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