छोटी-सी कमी, बड़े खतरे
21 अक्टूबर को पूरी दुनिया “विश्व आयोडीन अल्पता दिवस (Global Iodine Deficiency Day)” के रूप में मनाती है।
यह दिवस उस पोषक तत्व “आयोडीन” की महत्ता को याद दिलाता है, जो हमारे शरीर के सुचारु संचालन के लिए अत्यावश्यक है।
आयोडीन की कमी एक “मूक महामारी” की तरह है — दिखती नहीं, पर लाखों लोगों को प्रभावित करती है।
आयोडीन क्यों ज़रूरी है?
आयोडीन थायरॉइड ग्रंथि के सही कार्य के लिए आवश्यक तत्व है। इसकी कमी से
गलगंड (Goitre),थायरॉइड रोग,मानसिक मंदता (Mental Retardation),गर्भवती महिलाओं में जटिलताएँ,जैसे गंभीर परिणाम सामने आते हैं।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, विश्व की लगभग एक तिहाई आबादी कभी न कभी आयोडीन की कमी से प्रभावित होती है।
भारत और आयोडीन की कहानी
भारत जैसे विकासशील देशों में यह समस्या लंबे समय तक गंभीर रही।
इसीलिए भारत सरकार ने 1980 के दशक में “राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण कार्यक्रम (NIDDCP)” शुरू किया।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत आयोडीन युक्त नमक (Iodized Salt) को बढ़ावा दिया गया, जिससे देश में गलगंड और अन्य विकारों की दर में उल्लेखनीय कमी आई।
जागरूकता की आवश्यकता
आज भी ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में बहुत से लोग बिना आयोडीन वाला नमक उपयोग करते हैं।
21 अक्टूबर को इस दिवस के ज़रिए सरकारें, स्वास्थ्य संगठन और मीडिया जनता को जागरूक करते हैं कि
“एक छोटा बदलाव — आयोडीन युक्त नमक अपनाना — जीवनभर की बीमारियों से बचा सकता है।”
सेहत की रक्षा, जागरूकता से
आयोडीन की कमी को रोकना किसी दवा से नहीं, बल्कि सही जानकारी और आदतों से संभव है।
“विश्व आयोडीन अल्पता दिवस” इस बात का प्रतीक है कि स्वास्थ्य केवल डॉक्टर के पास नहीं, बल्कि हमारे रसोईघर में भी बसता है।
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