नाना पाटेकर के निधन से टूटा सिनेमा का सितारा, यूपी से भी रहा गहरा रिश्ता; काशी की गलियों से लखनऊ की साइबर मुहिम तक जुड़ीं यादें
अभिषेक के साथ परवीन की रिपोर्ट
वाराणसी/लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। हिंदी सिनेमा के सशक्त और अपनी अलग पहचान रखने वाले अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर से फिल्म जगत में शोक की लहर है। 75 वर्ष की उम्र में 8 अक्टूबर 2026 की सुबह गोवा स्थित अपने आवास पर उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने करीब 45 मिनट तक सीपीआर देकर उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके बेटे मल्हार पाटेकर की ओर से निधन की पुष्टि किए जाने के बाद प्रशंसकों और फिल्म जगत में शोक की लहर फैल गई।
नाना पाटेकर का उत्तर प्रदेश से रिश्ता केवल फिल्मों की शूटिंग तक सीमित नहीं रहा। काशी की गलियों में फिल्मांकन से लेकर लखनऊ में साइबर अपराध के खिलाफ जागरूकता अभियान तक, उनकी कई यादें यूपी से जुड़ी हुई हैं।
वर्ष 2000 में नाना पाटेकर अपनी फिल्म ‘आंच’ की शूटिंग के सिलसिले में वाराणसी पहुंचे थे। चौबेपुर क्षेत्र के छितौनी गांव में फिल्म की शूटिंग हुई थी। इसी दौरान उनकी मुलाकात संतोष नाम के एक स्थानीय युवक से हुई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह मुलाकात आगे चलकर रिश्ते में बदल गई और संतोष बाद में मुंबई जाकर नाना पाटेकर के घर पर रसोइए के रूप में काम करने लगे। इस घटना ने नाना के वाराणसी प्रवास को एक अलग मानवीय कहानी से जोड़ दिया।
करीब तीन दशक बाद नाना पाटेकर एक बार फिर काशी पहुंचे। नवंबर 2023 में वह फिल्म ‘जर्नी’ की शूटिंग के लिए वाराणसी आए थे। उस दौरान उन्होंने बनारस से अपने पुराने जुड़ाव का जिक्र करते हुए शहर को करीब से देखने की इच्छा जताई थी। शूटिंग के दौरान दशाश्वमेध और गोदौलिया क्षेत्र से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। बाद में फिल्म के निर्देशक अनिल शर्मा ने स्पष्ट किया कि वायरल दृश्य फिल्म का हिस्सा था। नाना पाटेकर ने भी इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए खेद व्यक्त किया था।
उत्तर प्रदेश से नाना पाटेकर का जुड़ाव सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में भी दिखाई दिया। यूपी पुलिस ने साइबर अपराध और तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ के प्रति लोगों को सचेत करने के उद्देश्य से ‘Scam Files’ नाम की शॉर्ट फिल्म तैयार की थी। इसमें नाना पाटेकर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। करीब साढ़े पांच मिनट की इस फिल्म में उन्होंने ऐसे जागरूक नागरिक का किरदार निभाया, जो साइबर ठगी के तरीके को समझते हुए लोगों को सावधान करता है।
इस अभियान का संदेश बेहद स्पष्ट था कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ कोई वास्तविक कानूनी प्रक्रिया नहीं है। साइबर ठग अक्सर खुद को पुलिस, सीबीआई या दूसरी जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को भयभीत करते हैं और फिर पैसे की मांग करते हैं। फिल्म के जरिए आम लोगों को ऐसे फर्जी फोन कॉल और वीडियो कॉल से सतर्क रहने का संदेश दिया गया।
नाना पाटेकर का यह यूपी कनेक्शन वर्ष 2026 में भी देखने को मिला। अगस्त 2026 में वह लखनऊ स्थित लोक भवन में आयोजित उत्तर प्रदेश पुलिस के कार्यक्रम में शामिल हुए थे। कार्यक्रम में पुलिस के गीत ‘खाकी का सितारा’ का शुभारंभ किया गया और साइबर जागरूकता से जुड़ी फिल्म की स्क्रीनिंग भी हुई। इस तरह अपने निधन से कुछ समय पहले तक नाना उत्तर प्रदेश से जुड़े एक महत्वपूर्ण जन-जागरूकता अभियान का हिस्सा बने रहे।
उनका जुड़ाव प्रयागराज के कलाकारों से भी रहा। मार्च 2026 में प्रयागराज के अभिनेता साकिब के नाना पाटेकर के साथ वेब सीरीज में काम करने की खबर सामने आई थी। इससे उत्तर प्रदेश की नई पीढ़ी के कलाकारों के साथ उनके जुड़ाव की एक और तस्वीर सामने आई।
नाना पाटेकर की पहचान सिर्फ एक अभिनेता के तौर पर नहीं थी। उनकी भारी आवाज, तीखे संवाद, भावपूर्ण अभिनय और किरदार में पूरी तरह उतर जाने की क्षमता ने उन्हें हिंदी सिनेमा में अलग मुकाम दिया। ‘क्रांतिवीर’, ‘परिंदा’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘अब तक छप्पन’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अपनी अभिनय क्षमता के अलग-अलग रंग दिखाए।
नाना पाटेकर के निधन से भारतीय सिनेमा ने एक ऐसा कलाकार खो दिया, जिसकी मौजूदगी पर्दे पर आते ही कहानी का असर कई गुना बढ़ जाता था। काशी से लेकर लखनऊ तक उत्तर प्रदेश से जुड़ी उनकी यादें भी अब उनकी लंबी फिल्मी यात्रा का हिस्सा बनकर रह गई हैं। उनकी आवाज, संवाद अदायगी और यादगार किरदार लंबे समय तक दर्शकों के जेहन में जीवित रहेंगे।
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