उतरौला/बलरामपुर (राष्ट्र की परम्परा)। लुप्त होती जा रही है पुरानी व्यवस्था, नए उम्र के लोगों को नही आता चारपाई की बुनाई करना। और नई उम्र वाले सीखना भीं जरूरी नहीं समझते। पुराने समय में चारपाई का अपना एक महत्त्व था, हर संभ्रांत आदमी के घर पर एसी चारपाई पाई जाती थी लेकिन समय के साथ विलुप्त होती जा रही है बुनाई का कौशल। पलंग के नाम से प्रसिद्ध ऐ चारपाई लोगों के आन बान शान की पहचान होती थी। रिश्तेदार हों या फिर कोइ वीआईपी आदमी उसी के लिए लोग बिछाते थे चारपाई। विभिन्न प्रकार से इसकी बुनाई हाेती थीं किंतु बदलते परिवेश में बेड, डबल बेड, दीवान, मशेहरी ने चारपाई के स्थान ले लिया। ग्राम हरकिशन के पुर्व प्रधान अलाउद्दीन खां ने बताया कि जो कुछ पुराने लोग है उन्ही को जानकारी है उनके न रहने पर चारपाई क्या होती है ऐ इतिहास के पन्नो में सिमट जाएगा।
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