महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। मुख्यमंत्री के प्रस्तावित आगमन की मात्र आहट से ही जिले के अफसरों व कर्मचारियों के कान खड़े हो गए हैं। आलम यह है कि जहां महीनों तक अनदेखी में पड़ी साफ-सफाई को किसी ने पूछा तक नहीं, वहीं अब रात-दिन सड़क के किनारे जमा कचरे को हटाने की मुहिम तेज हो गई है। नगर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक प्रशासन अचानक सक्रिय दिखाई दे रहा है।
शिकारपुर चौराहे से लेकर प्रमुख मार्गों पर सफाई कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों की गहमागहमी इस बात का सबूत दे रही है कि मैदानी स्तर पर पूर्व में चल रहे सफाई अभियानों की हकीकत कितनी खोखली थी। सड़क के किनारे उगी झाड़-झंखाड़, जमा गंदगी और लंबे समय से पड़े कचरे को हटाते हुए प्रशासन अब उस छवि को चमकाने में जुटा है, जिसे आम दिनों में ध्यान देने की आवश्यकता समझा ही नहीं गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आम दिनों में सफाई व्यवस्था भगवान भरोसे रहती है, लेकिन वीवीआईपी मूवमेंट होते ही प्रशासन की कलई खुल जाती है। अफसरों की टीम सुबह-शाम निरीक्षण में जुट जाती है, कहीं कचरा नजर न आ जाए, कहीं गड्ढे से पानी न भरता मिले, कहीं रास्ता टूटा पाया गया तो आनन-फानन में पैच वर्क शुरू कर दिया जाता है। यही नहीं, सरकार की छवि बेहतर दिखाने के लिए महकमे के कर्मचारी इलाके- इलाके में तुरंत सुधार का नाटक कर रहे हैं। कूड़े के ढेर हटाने, नालियों की सफाई और सड़क किनारों में पुताई का काम तेजी से कराया जा रहा है। जबकि हकीकत यह है कि आम दिनों में शिकायतों के बावजूद महीनों तक न तो सफाई होती है, न ही जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचते हैं। ग्राम पंचायत अधिकारी भीसवां एक वीडियो में सफाई के नाम पर साफ झूठ बोलते नजर आ रहें हैं कि अभी दो महीने पहले शिकारपुर की सफाई करवाए थे।जनता का कहना है कि वास्तविक विकास और साफ-सुथरी व्यवस्था दिखावा करने से नहीं, बल्कि स्थायी और नियमित काम से बनती है। मुख्यमंत्री का दौरा प्रशासन को जगाने का काम तो जरूर करता है, पर सवाल यह है कि क्या यह जागरूकता उनके लौटते ही फिर नींद में बदल जाएगी?
मुख्यमंत्री के आगमन ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि जिले में अचानक की सुधार संस्कृति आज भी जारी है। व्यवस्था को चमकाने के लिए की जा रही यह हड़बड़ी दिखावे से आगे निकले, तभी जनता को वास्तविक राहत मिल पाएगी।
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