मुंबई (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) गणेश चतुर्थी के मौके पर बुधवार को शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे अपने चचेरे भाई और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे के आवास पर पहुँचे। नवंबर 2021 में राज ठाकरे के नए आवास में शिफ्ट होने के बाद यह उद्धव ठाकरे की पहली यात्रा थी। इस अवसर पर उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे और उनके बेटे, पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे भी साथ मौजूद थे।
दोनों परिवारों की यह मुलाक़ात भले ही “पारिवारिक” बताई जा रही हो, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे बेहद अहम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, दोनों ने दोपहर का भोजन साथ किया। शिवसेना (यूबीटी) के एक वरिष्ठ नेता ने स्पष्ट किया कि यह निजी मुलाक़ात थी और राजनीति पर कोई बातचीत नहीं हुई। हालांकि, मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनावों से पहले इस तरह का मेल-मिलाप गठबंधन की दिशा में बड़ा संकेत माना जा रहा है।
पिछले दो दशकों से दोनों चचेरे भाइयों को एक साथ लाने की कई कोशिशें नाकाम रही हैं। लेकिन 2024 के विधानसभा चुनावों में शिवसेना और मनसे के निराशाजनक प्रदर्शन ने अब सुलह की मांग को और तेज़ कर दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीएमसी चुनावों में भाजपा और शिंदे गुट के बढ़ते दबदबे को देखते हुए उद्धव ठाकरे गठबंधन के लिए पहले से कहीं अधिक उत्सुक हैं।
हाल ही में बेस्ट वर्कर्स क्रेडिट सोसाइटी चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) और मनसे ने मिलकर किस्मत आजमाई थी, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस नतीजे ने दोनों दलों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अलग-अलग चुनाव लड़ने से मुकाबला और मुश्किल हो सकता है।
गणेशोत्सव के बीच ठाकरे बंधुओं की यह नज़दीकी न सिर्फ़ परिवारिक रिश्तों को ताज़ा करती है, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले दिनों में बड़े बदलाव की आहट भी देती है।
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