BRICS Summit 2026: भारत की कूटनीति का कमाल, पहलगाम से पश्चिम एशिया तक बना दबदबा

BRICS 2026: नई दिल्ली में भारत का कूटनीतिक दबदबा, पहलगाम से ईरान-UAE तक हासिल की बड़ी उपलब्धियां


नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती सदस्य देशों के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक मतभेदों के बीच साझा सहमति कायम करना थी। यूक्रेन संकट, पश्चिम एशिया में तनाव, व्यापारिक टकराव और अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता के बीच नई दिल्ली ने सम्मेलन को किसी एक धड़े के पक्ष में जाने से रोकते हुए संतुलित रुख अपनाया। 12 सितंबर को सदस्य देशों द्वारा सर्वसम्मति से नई दिल्ली घोषणापत्र स्वीकार किया जाना भारत की अध्यक्षता की अहम उपलब्धि माना जा रहा है।
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रोफेसर जेफरी सैक्स ने भी भारत की इस भूमिका को महत्वपूर्ण संस्थागत सफलता बताया। उनके मुताबिक, बेहद चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत ने आम सहमति बनाने की अपनी कूटनीतिक क्षमता साबित की।
ईरान और UAE के बीच संवाद का मंच बना भारत
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत के लिए सबसे अहम कूटनीतिक उपलब्धियों में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच उच्चस्तरीय संवाद भी रहा। पश्चिम एशिया में जारी तनाव को लेकर दोनों देशों के रुख में अंतर रहा है, जिससे ब्रिक्स के भीतर भी सहमति प्रभावित होने की आशंका थी।
नई दिल्ली घोषणापत्र में पश्चिम एशिया में तनाव कम करने, संयम बरतने और कूटनीतिक रास्ते से समाधान की जरूरत पर जोर दिया गया। इसी माहौल में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की मुलाकात को महत्वपूर्ण माना गया। भारत के लिए यह इसलिए अहम रहा क्योंकि उसने क्षेत्रीय मतभेदों को ब्रिक्स की सामूहिक कार्यप्रणाली पर हावी होने से रोकने में भूमिका निभाई।
साझा घोषणापत्र के जरिए ब्रिक्स की विश्वसनीयता मजबूत
ब्रिक्स के विस्तार के बाद विभिन्न देशों के हितों में बढ़ती विविधता के कारण सर्वसम्मति बनाना पहले से कठिन हुआ है। 2025 में रियो डी जेनेरियो में हुई विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान साझा बयान जारी नहीं हो सका था। ऐसे में दिल्ली शिखर सम्मेलन से पहले भी घोषणापत्र को लेकर सवाल उठ रहे थे।
लेकिन भारत की अध्यक्षता में सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से नई दिल्ली घोषणापत्र को मंजूरी दी। दस्तावेज में वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार, विकास के लिए वित्त, व्यापार, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों को जगह दी गई। घोषणापत्र में भारत की अध्यक्षता और शिखर सम्मेलन की मेजबानी की भी सराहना की गई।
यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे संकेत मिला कि मतभेदों के बावजूद ब्रिक्स साझा एजेंडे पर आगे बढ़ सकता है।
पहलगाम आतंकी हमले पर भारत को अहम सफलता
भारत के लिए नई दिल्ली घोषणापत्र का एक और महत्वपूर्ण पक्ष 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले का उल्लेख रहा। घोषणापत्र में जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी।
दस्तावेज में आतंकवाद, आतंकी वित्तपोषण, आतंकवादियों की सीमा-पार आवाजाही और सुरक्षित पनाहगाहों के खिलाफ सख्त रुख दोहराया गया। साथ ही आतंकवाद से निपटने में दोहरे मानदंडों को अस्वीकार करने और आतंकी गतिविधियों में शामिल लोगों तथा उनके समर्थकों को जवाबदेह ठहराने पर जोर दिया गया।
हालांकि घोषणापत्र में पाकिस्तान का नाम नहीं लिया गया, लेकिन पहलगाम हमले का स्पष्ट उल्लेख भारत के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है। खासकर इसलिए कि ब्रिक्स में चीन भी शामिल है और उसके पाकिस्तान के साथ करीबी रणनीतिक संबंध हैं।
ब्रिक्स को अमेरिका-विरोधी मंच बनने से रोका
भारत के सामने एक अन्य चुनौती यह थी कि ब्रिक्स को अमेरिका या पश्चिम के खिलाफ किसी स्पष्ट राजनीतिक गठबंधन का रूप लेने से कैसे रोका जाए। चीन और रूस की अपनी रणनीतिक प्राथमिकताएं हैं, लेकिन भारत ने विकासशील देशों के हितों को प्रमुखता देते हुए संतुलित दृष्टिकोण अपनाया।
नई दिल्ली घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक वित्तीय संस्थानों में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने की वकालत की गई। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार तथा भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका की आकांक्षाओं के समर्थन का भी उल्लेख किया गया।
दस्तावेज में एकतरफा प्रतिबंधों और संरक्षणवादी नीतियों की आलोचना की गई, लेकिन भाषा को सीधे तौर पर पश्चिम-विरोधी स्वरूप नहीं दिया गया। यही भारत की कूटनीति की खासियत रही—पश्चिम-विरोधी नहीं, बल्कि गैर-पश्चिमी और बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था के पक्ष में रुख।
अलग-अलग हितों वाले देशों को एक मंच पर लाया भारत
18वें ब्रिक्स सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धि शायद यही रही कि भारत ने बेहद विविध हितों वाले देशों को साझा एजेंडे पर साथ रखने में सफलता हासिल की। ब्रिक्स के विस्तार के बाद समूह में राजनीतिक व्यवस्थाओं, आर्थिक प्राथमिकताओं और रणनीतिक साझेदारियों का दायरा काफी बढ़ गया है।
रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया के तनाव ने इस चुनौती को और जटिल बना दिया था। इन संघर्षों का असर ऊर्जा, व्यापार, समुद्री परिवहन, आपूर्ति श्रृंखला और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों तक पहुंचा है। इसके बावजूद नई दिल्ली घोषणापत्र में सदस्य देशों की अलग-अलग राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को स्वीकार करते हुए संवाद, कूटनीति और सहयोग पर जोर दिया गया।
भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान यह संदेश देने की कोशिश की कि ब्रिक्स केवल भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का मंच नहीं, बल्कि विकास, वित्त, तकनीक, व्यापार और ग्लोबल साउथ के हितों पर सहयोग का प्रभावी मंच भी हो सकता है।
अब चीन की अध्यक्षता पर निगाहें
नई दिल्ली शिखर सम्मेलन की सफलता के बाद अगली बड़ी चुनौती ब्रिक्स की आगामी अध्यक्षता को लेकर होगी। 2027 में चीन समूह की अध्यक्षता संभालेगा। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत की अध्यक्षता में बनी सहमति और संतुलन को आगे किस तरह कायम रखा जाता है।
कुल मिलाकर, 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ने भारत को केवल मेजबान देश के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे कूटनीतिक शक्ति-केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया जिसने गहरे मतभेदों के बीच संवाद और सहमति का रास्ता तैयार किया। पहलगाम आतंकी हमले की निंदा से लेकर ईरान-UAE संवाद और अमेरिका-विरोधी ध्रुवीकरण से दूरी तक, नई दिल्ली ने कई मोर्चों पर अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताओं को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया।

Editor CP pandey

Recent Posts

गुड मॉर्निंग देवरिया: सुबह की सैर से स्कूल तक पुलिस की निगरानी, एंटी रोमियो टीम सक्रिय

गुड मॉर्निंग देवरिया अभियान: मॉर्निंग वॉकर्स से संवाद, बुजुर्गों को भरोसा और बालिकाओं को सुरक्षा…

15 minutes ago

सहारनपुर से अयोध्या तक बदले अधिकारी, यूपी सरकार ने किए बड़े तबादले

यूपी की नौकरशाही में बड़ा फेरबदल, 14 IAS और 34 PCS अधिकारियों के तबादले लखनऊ…

50 minutes ago

शिक्षक से पुलिस और स्वास्थ्य तक हजारों नौकरियां, बिहार में भर्ती का बड़ा कैलेंडर तैयार

बिहार में बंपर सरकारी भर्ती का इंतजार खत्म होने की तैयारी, 1.17 लाख से अधिक…

1 hour ago

तीन-तीन सर्जरी भी नहीं रोक सकीं उड़ान, अब भारतीय टीम पर नेहा-बेबी की नजर

आंखों की रोशनी कमजोर पड़ी, हौसले नहीं: नेहा-बेबी ने फुटबॉल और क्रिकेट में रचा सफलता…

1 hour ago