जब हनुमान ने स्वयं को पहचाना: लंका-गमन से पूर्व आत्मबोध की दिव्य लीला रामकथा का प्रत्येक प्रसंग केवल इतिहास नहीं,…
पुनीत मिश्र “जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करी सकत कुसंग। चन्दन विष व्यापे नहीं, लिपटे रहत भुजंग॥”यह दोहा केवल काव्य-सौंदर्य…