मनरेगा कर्मियों के बकाया मानदेय भुगतान पर सख्ती, 25 से 30 मार्च तक एमआईएस फीडिंग पूरी करने के निर्देश

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। मनरेगा कर्मियों के लंबे समय से लंबित मानदेय भुगतान को लेकर शासन स्तर पर सख्ती दिखाई गई है। संयुक्त आयुक्त (मनरेगा) ग्राम्य विकास उत्तर प्रदेश संजय कुमार पाण्डेय द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि मनरेगा कर्मियों के बकाया मानदेय और ईपीएफ भुगतान से जुड़ी सभी प्रविष्टियों को निर्धारित समय के भीतर एमआईएस प्रणाली पर पूर्ण किया जाए, ताकि कर्मियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।

जारी पत्र में बताया गया है कि आयुक्त कार्यालय द्वारा पूर्व में पत्रांक 504/मनरेगा सेल/प्रा.सं. 08(ए)/2025-26 दिनांक 28 फरवरी 2026 के माध्यम से मनरेगा कर्मियों के लंबित मानदेय और ईपीएफ भुगतान से संबंधित कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद कई विकास खंडों द्वारा अभी तक एमआईएस प्रणाली में आवश्यक प्रविष्टियां पूरी नहीं की गई हैं, जिसके कारण कर्मियों के भुगतान में देरी हो रही है।

पत्र के अनुसार मनरेगा कर्मचारी महासंघ उत्तर प्रदेश के साथ हुई वार्ता के बाद यह निर्णय लिया गया है कि मार्च 2026 के मानदेय की फीडिंग 25 मार्च से 30 मार्च 2026 के बीच हर हाल में पोर्टल पर पूरी की जाए। यदि धनराशि उपलब्ध रहती है तो इस अवधि के बाद कर्मियों के मानदेय का भुगतान सुनिश्चित किया जा सकेगा।

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निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह व्यवस्था केवल मार्च 2026 के लिए लागू होगी। इसके बाद प्रत्येक माह मनरेगा कर्मियों के मानदेय की फीडिंग माह की 1 से 5 तारीख के बीच अनिवार्य रूप से की जाएगी।
संयुक्त आयुक्त ने सभी जनपदों के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि विकास खंड स्तर पर मनरेगा कर्मियों के लंबित मानदेय और ईपीएफ से संबंधित प्रविष्टियों को तत्काल एमआईएस प्रणाली में अपडेट कराया जाए। साथ ही होल्डिंग अकाउंट में उपलब्ध ईपीएफ की धनराशि को संबंधित कर्मियों के पीएफएमएस खातों में शीघ्र स्थानांतरित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

अधिकारियों को यह कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को कहा गया है, ताकि मनरेगा कर्मियों के बकाया भुगतान का जल्द निस्तारण हो सके और उन्हें आर्थिक राहत मिल सके।

इधर उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ, जिला इकाई महराजगंज ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया है। जिलाध्यक्ष ब्रह्मानंद, जिला महासचिव इंद्रमणि विश्वकर्मा सहित कई ग्राम रोजगार सेवकों ने इसे कर्मियों के हित में उठाया गया सकारात्मक कदम बताया।

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Karan Pandey

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