आया बसन्त आया बसन्त,
दिवदिगन्त में छाया बसन्त।
तरु पल्लव किसलय झूम रहे,
खेतों में सरसों फूल रहे,
नवकलिका आँखे खोल रहीं,
वासंती छटा निहार रहीं,
कोमल लतिका भी डोल रही,
उद्यान की शोभा बढ़ा रही,
बहुरंगी पुष्प सुगन्धित हैं,
माली का मन प्रफुल्लित है,
कृषक का मन अति हर्षित है,
प्रकृति भी हुई तरंगित है।

पुष्प पराग मधुर रस पीकर,
भवरे गुंजन करते हैं,
उद्यान वाटिका में निशि दिन,
उन्मुक्त हो विचरण करते हैं,
तितली भी पीत चुनर ओढ़े,
उड़ उड़ करके यह कहती है,
आया बसंत आया बसंत छाया बसंत।

शीत ऋतु की शीत लहर,
अब अपना मुखड़ा छुपा रही,
काँपते ठिठुरते जन जन को
कुछ-कुछ राहत दिला रही,
पंछी भी कलरव करते हैं,
बसंती राग सुनाते हैं,
बहती है मंद बयार पवन,
जो मंद मंद मुस्काती है,
जन जन के मानस मंदिर में,
सोया हुआ प्राण जगाती है,
यही तो है संदेश बासंती,
नित नूतन कुछ करने का,
और नित नूतन कुछ गढ़ने का।
करते बसंत का स्वागत हम,
संकल्प सृजन का लेते हम,
भाव पुष्प की माला को,
चरणों में अर्पित करते हैं,
बसंती संदेश आगया,
प्रकृति का संदेश आ गया।
आया बसंत छाया बसंत आया बसंत।

कवियित्री सुभद्रा द्विवेदी,
लखनऊ

rkpnews@desk

Recent Posts

एनसीसी कैडेट्स को दिया गया सैन्य अनुशासन और संचार का प्रशिक्षण

इंसास राइफल की विशेषताओं से कराया परिचित, दूरसंचार व्यवस्था की भी दी जानकारी महराजगंज (राष्ट्र…

3 hours ago

अमृत सरोवर के पास क्षतिग्रस्त पुलिया बनी खतरा, बच्चों पर मंडरा रहा हादसे का डर

एक महीने से मरम्मत का इंतजार, ग्राम प्रधान और लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर…

3 hours ago

10.530 ग्राम स्मैक के साथ दो आरोपी गिरफ्तार, कार और नकदी बरामद

इलेक्ट्रॉनिक कांटा, दो मोबाइल फोन और 2500 रुपये भी मिले; एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा…

3 hours ago