कैंटीन में बिकता धीमा जहर-दीप्ति

मुम्बई(राष्ट्र की परम्परा)
आजकल दोनों माता-पिता वर्किंग हैं। सुबह का समय इतना व्यस्त होता है कि टिफ़िन तैयार करना और बच्चों का पूरा ध्यान रखना चुनौती बन जाता है। ऐसे में माता-पिता अक्सर मोटी फीस देकर नामी स्कूल चुनते हैं, यह सोचकर कि उनका बच्चा न सिर्फ़ अच्छी शिक्षा पाएगा, बल्कि स्कूल की कैंटीन में मिलने वाला खाना भी सुरक्षित और पौष्टिक होगा।
लेकिन हकीकत यह है कि कई स्कूलों में वही पैकेट में बंद ‘हेल्दी’ दिखने वाले स्नैक्स बिकते हैं, जो पाम ऑयल, रिफाइंड ऑयल, रिफाइंड व्हीट फ्लोर (मैदा) और व्हाइट शुगर से बने होते हैं। इन पैकेट्स में कभी-कभी फलों या अनाज का छोटा सा हिस्सा मिला दिया जाता है लगभग 10–25 प्रतिशत और बाकी का हिस्सा वही पुराना, पाम आयल या रिफाइन आयल उसके साथ preservatives or enhancer होते है जो हानिकारक केमिकल होते है।
जिनको वो “हेल्दी” फ़ूड दिखाकर बेचते है।कुछ बच्चे स्कूल टिफ़िन लेकर भी कैंटीन की ओर खिंचे चले जाते हैं। इसका कारण केवल स्वाद या जिज्ञासा नहीं, बल्कि दोस्तों की देख-देखी और सभी दूसरे बच्चे ले रहे हैं तो मैं भी लूँ की आदत होती है। वहीं, कई स्कूल पैकेज ऑफर देते हैं। कूपन या मॉर्निंग-ब्रेक पैक, जिसमें टिफ़िन के साथ-साथ पैक्ड स्नैक और फ्लेवर्ड ड्रिंक भी शामिल होते हैं। इससे बच्चे बिना सोचे-समझे इन जंक फूड्स की ओर बढ़ जाते हैं।
पोषण विशेषज्ञ बताते हैं कि पाम ऑयल में लगभग 50 प्रतिशत सैचुरेटेड फैट होता है, जो शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है। रिफाइंड ऑयल और मैदा पोषण खो चुके होते हैं और मोटापा, सूजन और मेटाबॉलिक समस्याएँ बढ़ाते हैं। वहीं व्हाइट शुगर बच्चों को कम उम्र में ही मीठे की लत लगाती है और भविष्य में डायबिटीज़ तथा हार्ट डिज़ीज़ का खतरा पैदा करती है।
शहरी भारत में लगभग 25 प्रतिशत बच्चे ओवरवेट या मोटापे की श्रेणी में पहुँच चुके हैं। बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले 5–7 वर्षों में बच्चों में फैटी लिवर, हाई कोलेस्ट्रॉल और प्री-डायबिटिक लक्षण दोगुनी बढ़ गए हैं। और सबसे हैरानी की बात यह है कि इनमें बड़ी संख्या उन बच्चों की है जो तथाकथित अच्छे और महँगे स्कूलों में पढ़ते हैं।
जमीनी सच्चाई यह है कि महँगी फ़ीस वाले स्कूलों की कैंटीनों में 70-80 प्रतिशत बिक्री पैकेट फूड, बेक्ड स्नैक्स और शुगर-युक्त ड्रिंक्स से होती है। फल, अंकुरित अनाज या मिलेट्स आधारित ताज़ा भोजन या तो बहुत सीमित होता है या सिर्फ दिखावे के लिए रखा जाता है।
अब सवाल उठता है-जिम्मेदार कौन है?
सरकार: स्कूल कैंटीन के लिए सख़्त और स्पष्ट नियम बनाये जाएँ। पाम ऑयल, रिफाइंड ऑयल, मैदा और व्हाइट शुगर पर सीमा तय हो और “हेल्दी” शब्द के इस्तेमाल की निगरानी हो।
स्कूल प्रबंधन: कैंटीन केवल मुनाफ़े का साधन नहीं है। स्कूल मैनेजमेंट ओर स्कूल हेड को हेल्थी प्रोडक्ट ही कैंटीन में रखने चाहिये ओर निश्चय करना चाहिए कि बच्चों की थाली में क्या जा रहा है।
माता-पिता: महँगी फ़ीस और स्कूल के नाम पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं। कैंटीन मेनू पर सवाल उठाएँ, सामग्री की सूची देखें, और बच्चों को भी सिखाएँ कि क्या चुनना सुरक्षित है।उसके ingredients को पैकेट में देखे।
विशेषज्ञ कहते हैं कि यह अब व्यक्तिगत पसंद या स्वाद का मुद्दा नहीं रहा। यह एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। जिस उम्र में बच्चों का शरीर और दिमाग मजबूत होना चाहिए, उसी उम्र में अगर बीमारी की नींव रख दी गई, तो इसका असर पूरी ज़िंदगी पर पड़ेगा।
अब समय आ गया है कि स्कूल-कॉलेज कैंटीन को कमाई का केंद्र नहीं, बल्कि सेहत का केंद्र बनाया जाए। दिखावे वाले हेल्दीपन से आगे बढ़कर सच्चे पोषण की ओर कदम उठाना ही भविष्य की पीढ़ी को बचाने का एकमात्र रास्ता है।

rkpnews@somnath

Recent Posts

देवरिया में Flipkart डिलीवरी बॉय की हड़ताल: घटती मजदूरी, बीमा कटौती और OBD सिस्टम के खिलाफ फूटा गुस्सा

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। देवरिया में Flipkart से जुड़े डिलीवरी कर्मियों ने अपनी मांगों को…

4 hours ago

महिला आरक्षण पर सियासी संग्राम, संसद में निर्णायक बहस

2029 चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी, संशोधन प्रस्ताव पर सरकार-विपक्ष आमने-सामने…

5 hours ago

तेल, ताकत और टकराव: 2026 का सबसे बड़ा वैश्विक संकट

होर्मुज़ संकट 2026: अमेरिकी नाकेबंदी, चीनी चुनौती और बदलता वैश्विक शक्ति संतुलन पश्चिम एशिया में…

5 hours ago

लखनऊ में भीषण आग: विकासनगर सेक्टर-14 में 200 झोपड़ियां जलकर खाक, सिलेंडर धमाकों से मची अफरा-तफरी

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। लखनऊ के विकासनगर सेक्टर-14 में बुधवार दोपहर एक भीषण आग लगने…

16 hours ago

यूपी में बड़ा रेल हादसा: प्रयागराज में ट्रेन की चपेट में आने से 5 लोगों की मौत, शव देखने ट्रैक पर गए थे सभी

प्रयागराज (राष्ट्र की परम्परा)। बुधवार शाम एक बेहद दर्दनाक रेल हादसा सामने आया, जिसमें पांच…

16 hours ago

अधिवक्ता मौत के बाद उठे सवाल, डीएम पहुंचीं गांव- परिजनों से मिलकर दिलाया न्याय का भरोसा

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। तहसील क्षेत्र के ग्राम लक्ष्मीपुर में अधिवक्ता विजेंद्र सिंह की मौत…

16 hours ago