नवरात्रि का नवां दिन अध्यात्म, भक्ति और साधना का चरम माना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के नवम स्वरूप “सिद्धिदात्री” की पूजा-अर्चना की जाती है।
पौराणिक मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री समस्त सिद्धियों और कल्याणकारी शक्तियों की दात्री हैं। भक्तजन इस दिन विशेष विधि से पूजन कर सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
🔱 मां सिद्धिदात्री का स्वरूप और महत्व
मां सिद्धिदात्री, देवी दुर्गा का अंतिम और सर्वोच्च स्वरूप हैं। “सिद्धि” का अर्थ है अद्भुत शक्ति और “दात्री” का अर्थ है दान करने वाली। शास्त्रों के अनुसार:
मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों को अष्ट सिद्धियां (अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व) तथा नव निधियां प्रदान करती हैं।
शिवपुराण में वर्णन है कि भगवान शिव ने इन्हीं की कृपा से अर्धनारीश्वर रूप धारण किया।
मां की चार भुजाएं हैं, वे कमल पर विराजमान होती हैं और हाथों में गदा, चक्र, शंख और कमल धारण करती हैं।
🙏 नवमी पूजन-विधि
नवरात्रि की नवमी तिथि पर पूजा का विशेष महत्व है। संपूर्ण विधि इस प्रकार है –
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