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श्री चंडी माता भक्तों की करती है मनोकामना पूर्ण

बड़हलगंज/गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
श्री चंडी माता मंदिर अति प्राचीन मंदिर है जो सरयू के उत्तर भाग में पावन तट पर स्थित है। जन श्रुतियों के आधार पर मंदिर आज से लगभग 300 वर्ष पुराना बताया जाता है, लोगों का कहना है कि सबसे पहले यह एक विशाल जंगल था जिसमें थारु जातियां निवास करती थी और घने जंगल में माता जी की पिंडी बनाकर थारू जाती के लोग पूजा पाठ करते थे। कालांतर में जंगल धीरे-धीरे कटते गए और आबादी के रूप में लोग बसते गए । गांव के बुजुर्गों ने बताया कि बड़हलगंज दोहरीघाट को जोड़ने वाला पुल का निर्माण कार्य चल रहा था लेकिन सरयू के बीच में एक पाए का निर्माण नहीं हो पा रहा था, पूर्ण निर्माण के लिये इंजीनियर प्रयास करके थक चुके थे। उस समय मंदिर के पुजारी चंडी माता के स्थान से अगरबत्ती की जली हुई राख को ले जाकर, जो बार-बार पाया नहीं बन पा रहा था उसमें माता रानी का नाम लेकर डाल दिए उसके अगले दिन से ही पाया बनकर तैयार होने लगा, यह सब माता चंडी जी की कृपा का प्रसाद था। पुल निर्माण के बाद बचे हुए सामान को इंजीनियर ने माता रानी के मंदिर के निर्माण के लिए दे दिया। धीरे-धीरे इसकी चर्चा पूरे क्षेत्र में होने लगी आगे चलकर ग्राम वासियों और क्षेत्रवासियों के सहयोग से मंदिर का निर्माण कराया गया। मंदिर को विकास की गति मिले इसके लिए श्री चंडी माता हनुमान मंदिर सेवा संस्थान का रजिस्ट्रेशन 2009 में कराया गया आज मंदिर पूर्ण रूप से तैयार है। और आगे भी विभिन्न कार्यों को करने की योजनाएं चल रही है, यह जानकारी चंडी माता हनुमान मंदिर सेवा संस्थान के अध्यक्ष पंडित विनय मिश्र ने दी। उन्होंने बताया कि मंदिर में पोखर का सुंदरी करण माता रानी मंदिर का गुंबद के निर्माण के लिए संस्थान सक्रिय है, इस मंदिर पर श्रद्धालुओं द्वारा पूरे विधि विधान से शारदीय नवरात्र एवं बसंती नवरात्र में पूजन किया जाता है। माता अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करती जो भी मनोकामना से यहां आता है माता रानी मनोकामना पूर्ण करती है। मंदिर परिसर में हनुमान जी का मंदिर भी स्थित है परिसर में ही शीतला माता मंदिर भी स्थित है। यहां गोरखपुर ,देवरिया ,कुशीनगर ,मऊ, आजमगढ़ आदि जनपदों से श्रद्धालु आते हैं और मां की पूजा पाठ करते हैं। वैसे तो यहां साल भर कार्यक्रम चलता रहता है ।

rkpnews@somnath

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