क्रन्तिकारी मंगल पाण्डेय के जन्मदिन पर संगोष्ठी का आयोजन

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय स्वातंत्र्य समर 1857 प्रथम विद्रोह के प्रथम क्रांतिकारी मंगल पांडेय के 198वें जन्म जयंती के अवसर पर गुरुकृपा संस्थान गोरखपुर एवं बलिदानियों को समर्पित संगठन अखिल भारतीय क्रांतिकारी सम्मान संघर्ष मोर्चा के संयुक्त तत्वावधान में दाऊदपुर स्थित कार्यालय में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मंगल पांडेय के जीवन पर प्रकाश डालते हुए संगठन के अध्यक्ष बृजेश राम त्रिपाठी ने कहा कि भारत मां को गुलामी की जंजीरों से मुक्ति दिलाने एवं देश को स्वतंत्र कराने के लिए मंगल पांडेय ने अपना सर्वोच्च बलिदान कर दिया। मंगल पांडेय जैसे देश के असंख्य युवाओं ने राष्ट्र ही प्रथम है, जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से महान है का भाव लेकर फांसी पर झूल गए। त्रिपाठी ने आगे कहा कि 1857 का गदर असफल नहीं था, 29 मार्च 1857 का विद्रोह पूर्णरूपेण सफल रहा जिसकीे धधकी चिंगारी से देश में चहुंओर क्रांति फैली जिसका परिणाम था कि 1947 में देश आज़ाद हुआ। अखिल भारतीय क्रांतिकारी सम्मान संघर्ष मोर्चा संगठन देश के लिए अपना सर्वोच्च समर्पण से जीना मरना सिखाता है। मेरा कण कण राष्ट्र के लिए बलिदान हो। उन्होंने कहा कि गुरुकृपा संस्थान क्रांतिकारी परंपरा को जीवंत रखने के लिए मै रहूं या ना रहूं यह देश रहना चाहिए। यह ऐतिहासिक एवं अद्वितीय कार्य है। अंग्रेज भली भांति जानते थे कि भारत को जितने एवं तोड़ने के लिए भेद भाव का बीजारोपण करना होगा। धर्म और संस्कृति नष्ट होता है तो राष्ट्र का अस्तित्व खतरे में पड़ जाता है। विशिष्ट अतिथि भूतपूर्व सैनिक शंकर शरण दूबे ने कहा कि गुरुकृपा संस्थान का यह प्रयास अनुकरणीय एवं प्रशंसनीय है। आयोजन पर मुझे खुशी है, ऐसा आयोजन देश के हर कोने में होना चाहिए। जिससे युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिलती रहे और उनमें देश प्रेम का उत्साह बना रहे। मैं गुरुकृपा संस्थान के सभी कर्मयोगियों की प्रशंसा करता हूं और आशीर्वाद देता हूं कि क्रांतिकारियों के प्रति ये दीवानगी और रवानगी ताउम्र बनी रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रवक्ता आलोक शुक्ला ने कहा कि मंगल पांडेय प्रथम स्वातंत्र्य की मशाल जलाने वाले अप्रतिम योद्धा थे। मंगल पांडेय के बलिदान से देश के अन्य हिस्सों में विद्रोह को रोकने के लिए 10 दिन पहले फांसी दे दिया। प्रथम क्रांति के जनक को कैंपस की ओर से मंगल पांडेय को नमन करते हैं।
संचालन श्रद्धानंद त्रिपाठी ने किया तथा आभार ज्ञापन सुनील मिश्रा ने किया। इसके पूर्व अतिथियों ने भारत माता एवं मंगल पांडेय के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की विधिवत शुरुवात किया। राष्ट्रगान से कार्यक्रम प्रारंभ और राष्ट्रगीत से समापन किया गया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से शंकर शरण दूबे, श्रद्धानंद त्रिपाठी, अवनीश मणि त्रिपाठी, सूर्य प्रताप चौरसिया, संजय शुक्ला, आलोक शुक्ला, अजीत शुक्ला, सुनील मिश्रा, प्रदीप त्रिपाठी, सहित अनेकों लोग उपस्थित थे।

Karan Pandey

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