एकल नागरिकता और प्रशासन की व्यवस्था पटेल की दूरदृष्टि का परिणाम- प्रो. विजय खरे
राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा पर गोरखपुर विश्वविद्यालय में संगोष्ठी
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के रक्षा एवं स्त्रातज़िक अध्ययन विभाग तथा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) के संयुक्त तत्वावधान में “राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा: मजबूत भारत की नींव – सरदार वल्लभभाई पटेल का योगदान” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी की शुरुआत हुई।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि सरदार पटेल आधुनिक भारत के निर्माण के मजबूत आधार स्तंभ हैं। समानता और भाईचारा राष्ट्रीय एकता के लिए आवश्यक तत्व हैं और भारतीय संस्कृति अपनी अद्वितीय परंपराओं व मूल्यों के लिए जानी जाती है।
वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने मुख्य वक्ता के रूप में सरदार पटेल की दूरदर्शी प्रशासनिक भूमिका और विभाजन से जुड़े मुद्दों पर प्रकाश डाला। विशेष अतिथि ब्रिगेडियर (प्रो.) जीवन सिंह राजपुरोहित ने पटेल की तुलना आचार्य कौटिल्य और छत्रपति शिवाजी से करते हुए 562 रियासतों के एकीकरण में उनके योगदान को रेखांकित किया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की प्रो. भारती दास ने कहा कि पटेल के विचार आज भी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक दृष्टि से प्रासंगिक हैं। पुणे विश्वविद्यालय के प्रो. विजय खरे ने एकल नागरिकता, प्रशासन और यथार्थवादी विदेश नीति को पटेल की दूरदृष्टि का परिणाम बताया। सत्र का संचालन डॉ. अभिषेक पाल ने किया, स्वागत उद्बोधन विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार सिंह ने दिया और आभार ज्ञापन डॉ. आरती यादव ने किया। पहले दिन आयोजित दो तकनीकी सत्रों में विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों ने 15 शोध पत्र प्रस्तुत किए। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के प्रोफेसर, शोधार्थी, अधिकारी और देशभर से आए प्रतिभागी उपस्थित रहे।
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