स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास लेखन पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी 19-20 को

  • प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के समय में हो सकता है फेरबदल
  • 1857 की क्रांति और प्लासी युद्ध के बीच होगी बड़ी बहस
  • 1857 के पूर्व एवं पश्चात के ऐतिहासिक साक्ष्यों की होगा नए सिरे से मंथन
    • दो दिवसीय राष्ट्रीय मंथन में उजागर हो सकते हैं नए ऐतिहासिक तथ्य
  • उत्तर प्रदेश राज्य अभिलेखागार, लखनऊ के तत्वावधान में लगेगी भव्य प्रदर्शनी
  • दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन करेगा इतिहास विभाग

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग तथा उत्तर प्रदेश राज्य अभिलेखागार के संयुक्त तत्वावधान में महायोगी श्री गुरु गोरक्षनाथ शोधपीठ में 19 व 20 फरवरी को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित होगी। संगोष्ठी का विषय है— “भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की गूँज: इतिहास लेखन (आंदोलन की केंद्रभूमि उत्तर प्रदेश के संदर्भ में)”।
संगोष्ठी में अब तक इतिहास की पुस्तकों में दर्ज मान्यताओं पर पुनर्मंथन किया जाएगा। 1857 की क्रांति को भारत के प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन के रूप में दर्ज किए जाने के संदर्भ में क्रांतिकारी फतेह बहादुर शाही की भूमिका सहित कई ऐतिहासिक तथ्यों पर नए सिरे से चर्चा होगी। क्रांतिकारी फतेह बहादुर शाही, बंधू सिंह, मोहम्मद हसन, बाबा दिग्विजयनाथ, बाबा राघव दास, हनुमान प्रसाद पोद्दार, दशरथ द्विवेदी, शिब्बनलाल सक्सेना, फिराक गोरखपुरी, हकीम आरिफ, गणेश शंकर विद्यार्थी, लाल मोहम्मद साईं आदि के योगदान का उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार यह चिंतन शिविर कई स्थापित ऐतिहासिक तथ्यों में रचनात्मक पुनर्व्याख्या का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
संगोष्ठी में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली से लगभग 20 शोधार्थी और शिक्षक भाग लेंगे। विषय से संबंधित एक प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड स्टडी के निदेशक एवं भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद के सदस्य प्रो. हिमांशु चतुर्वेदी उपस्थित रहेंगे। सारस्वत अतिथि के रूप में अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. बालमुकुंद पाण्डेय शामिल होंगे। विशिष्ट अतिथि के रूप में भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद के सदस्य सचिव डॉ. ओम जी उपाध्याय तथा अन्य वक्ताओं में छपरा विश्वविद्यालय के प्रो. राजेश कुमार नायक, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रो. हृदय नारायण और लखनऊ विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त आचार्य प्रो. आरूप चक्रवर्ती संगोष्ठी को संबोधित करेंगे।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि यह विभाग और विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय है। ऐसे शैक्षणिक आयोजनों से शोधार्थियों को लाभ मिलता है और विश्वविद्यालय की शोध गुणवत्ता सुदृढ़ होती है। विभागाध्यक्ष एवं संयोजक प्रो. मनोज कुमार तिवारी ने बताया कि यह कार्यक्रम विभाग के लिए अवसर और उपलब्धि दोनों साबित होगा।

rkpNavneet Mishra

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