योगी आदित्यनाथ–मोहन भागवत मुलाकात: 2027 विधानसभा चुनाव और UGC विनियम 2026 पर मंथन से तेज हुई सियासी हलचल
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। योगी आदित्यनाथ और मोहन भागवत की लखनऊ में हुई मुलाकात ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत दो दिवसीय दौरे पर राजधानी में थे। निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में हुई यह बैठक करीब 40 मिनट चली। आधिकारिक तौर पर एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन 2027 विधानसभा चुनाव, UGC विनियम 2026, और संगठनात्मक समन्वय जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक शिष्टाचार नहीं थी, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीतिक तैयारियों का संकेत देती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में अपेक्षित प्रदर्शन न मिलने के बाद भाजपा के लिए राज्य की राजनीतिक जमीन और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
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UGC विनियम 2026 और सुप्रीम कोर्ट की रोक
हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा लाए गए UGC विनियम 2026 पर अंतरिम रोक लगाई थी। इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और पारदर्शिता बढ़ाना बताया गया था, लेकिन देशभर में इन पर विवाद खड़ा हो गया। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मोहन भागवत के साथ बातचीत में UGC विनियम 2026 के राजनीतिक प्रभाव और 2027 विधानसभा चुनाव पर संभावित असर को लेकर चिंता साझा की।
यह मुद्दा छात्रों, शिक्षकों और विपक्षी दलों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। यदि इस विवाद का समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो यह चुनावी विमर्श का बड़ा हिस्सा बन सकता है।
समाजवादी पार्टी का PDA फॉर्मूला चर्चा में
बैठक में समाजवादी पार्टी के पीडीए (PDA) फॉर्मूले पर भी मंथन हुआ। समाजवादी पार्टी द्वारा पेश किए गए इस सामाजिक समीकरण को भाजपा गंभीरता से देख रही है। हाल के महीनों में योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषणों में PDA अभियान का उल्लेख कर विपक्ष पर सीधा हमला बोला है।
मोहन भागवत ने लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में हिंदू एकता, धर्मांतरण और जनसंख्या असंतुलन जैसे मुद्दों पर जोर दिया। इसे भाजपा की वैचारिक दिशा और चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
RSS शताब्दी वर्ष और उत्तर प्रदेश का महत्व
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस वर्ष अपना शताब्दी समारोह मना रहा है। मोहन भागवत इससे पहले मथुरा और गोरखपुर का दौरा कर चुके हैं। संघ इसे जनसंपर्क अभियान का हिस्सा बता रहा है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी के रूप में भी देखा जा रहा है।
उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए निर्णायक राज्य है। संगठन की मजबूती, बूथ स्तर तक समन्वय और सरकार-संगठन के बीच तालमेल को बेहतर बनाने पर भी बैठक में चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।
2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, योगी आदित्यनाथ–मोहन भागवत मुलाकात में 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति, सामाजिक समीकरण और संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर विस्तार से विचार हुआ। भाजपा आगामी चुनाव को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले महीनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। संघ और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के बीच लगातार संवाद इसी दिशा में संकेत देता है।
योगी आदित्यनाथ और मोहन भागवत की यह मुलाकात उत्तर प्रदेश की सियासत में दूरगामी असर डाल सकती है। UGC विनियम 2026, 2027 विधानसभा चुनाव, और समाजवादी पार्टी का PDA फॉर्मूला आने वाले समय में राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रहेंगे। संघ के शताब्दी वर्ष के बीच हुई यह बैठक भाजपा की चुनावी रणनीति का अहम अध्याय मानी जा रही है।
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