माँ शीतला धाम के पुनर्निर्माण से पूर्वांचल को मिलेगा नया धार्मिक गौरव

मऊ (राष्ट्र की परंपरा)।पूर्वांचल की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को नई ऊँचाई देने जा रहा माँ शीतला धाम अब एक भव्य और दिव्य स्वरूप में निर्मित होगा। मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए महाराष्ट्र के लातूर जिले से सुप्रसिद्ध शिल्पकार रविराज गोपीनाथ राव करडखेले को विधिवत अनुबंधित किया गया है। जल्द ही निर्माण कार्य प्रारंभ होने जा रहा है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह और आस्था का वातावरण है।

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श्री शीतला माता धाम मंदिर समिति के अध्यक्ष संजय वर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि माँ शीतला धाम का निर्माण माँ शीतला की मनसा के अनुरूप, समग्र मऊ के हिंदू जनसमुदाय और सनातन परंपरा के आशीर्वाद से अत्यंत भव्य और आकर्षक रूप में किया जाएगा। मंदिर का सभा मंडप, शिखर, कलश और गुंबद वास्तु शास्त्र के अनुसार निर्मित होंगे, जो इसकी दिव्यता को और अधिक निखारेंगे।
उन्होंने बताया कि शिल्पकार रविराज गोपीनाथ को मंदिर के पुनर्निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो सीमित समय में उत्कृष्ट शिल्पकारी के साथ मंदिर को ऐसा स्वरूप देंगे, जिससे जनमानस की भावनाएँ साकार होंगी। यह माँ शीतला धाम न केवल मऊ बल्कि पूरे पूर्वांचल में अपनी अनूठी छटा बिखेरेगा।
मंदिर समिति के वरिष्ठ संरक्षक इंजीनियर वीरेंद्र कुमार तथा वाराणसी से आए अनुभवी इंजीनियरों की टीम ने संयुक्त रूप से मंदिर का विस्तृत नक्शा तैयार किया है। इस डिजाइन में परंपरा और आधुनिक इंजीनियरिंग का संतुलन रखा गया है, जिससे माँ शीतला धाम श्रद्धालुओं के लिए आस्था का भव्य केंद्र बने।
इस अवसर पर मंदिर परिसर में विधिवत पूजन-अर्चन किया गया। मंदिर के पुजारी आकाश ओझा ने मंत्रोच्चारण के साथ शिल्पकार रविराज गोपीनाथ को अग्रिम धनराशि का चेक और नारियल भेंट किया। समिति के महामंत्री डॉ. राम गोपाल गुप्ता ने बताया कि मंदिर का सभा मंडप और शिखर अयोध्या स्थित श्री राम मंदिर की वास्तुकला से प्रेरित होगा, जो भक्तों को आध्यात्मिक शांति और ऊर्जा प्रदान करेगा।

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अनुबंध समारोह में समिति के कोषाध्यक्ष उमाशंकर चौरसिया, उपाध्यक्ष संजय खंडेलवाल, निर्माण समिति के दिनेश बरनवाल, अरविंद बरनवाल, गिरीश चंद मद्धेशिया सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि माँ शीतला धाम पूर्वांचल का अद्वितीय और अनूठा धार्मिक केंद्र बनेगा।
यह मंदिर न केवल आस्था का प्रतीक होगा, बल्कि धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता को भी मजबूती देगा। माँ शीतला धाम का यह भव्य निर्माण आने वाले वर्षों में श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा और विश्वास का केंद्र बनेगा।

Editor CP pandey

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