देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद देवरिया द्वारा जनपद में शोभा यात्रा निकाला गया। शोभा यात्रा सुभाष चौक से शुरू हो कर मालवीय रोड अंसारी रोड, कोतवाली रोड होते हुए रामलीला मैदान के सामने स्थित शहीद रामचंद्र विद्यार्थी स्मारक पर जा कर समाप्त हुआ।
शोभा यात्रा के संयोजक के रूप में सविनय पाण्डेय उपस्थित रहे।
शोभा यात्रा में विभिन्न विद्यायल की छात्राओं द्वारा रूप सज्जा कर रानी लक्ष्मीबाई एवं अन्य वीरांगनाएं की रूप धारण कर शोभा यात्रा की शोभा बढ़ाई।
शोभा यात्रा को संबोधित करते हुए जिला संयोजक सौम्य वत्स मिश्र ने कहा कि भारत की आजादी की लड़ाई जिनका विशेष योगदान है- उनमें रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजी फौज से लड़ते हुए वीरगति पाई थी। एक नारी होकर, उन्होंने जिस साहस का परिचय दिया, वह अदभुत है और इसके कारण उनका नाम इतिहास में अमर है।
जिला सह संयोजक कुलदीप पाण्डेय ने कहा कि झांसी की रानी महा लक्ष्मीबाई ने भारत और झांसी की आजादी के लिए बलिदान दिया था। लक्ष्मीबाई मदद के लिए ग्वालियर के तत्कालीन महाराज सिंधिया के पास गई थीं किंतु सिंधिया ने अंग्रेजों का साथ दिया और महारानी लक्ष्मी बाई से मिलने की बजाय वह आगरा चले गए थे। अंग्रेजों को लक्ष्मी बाई के बारे में सटीक सूचना मिल गई थी और उन्होंने लक्ष्मीबाई को घेरकर हमला कर दिया था। यदि गद्दारी नहीं की जाती तो लक्ष्मी बाई को उस समय बलिदान नहीं देना पड़ता। और तब इस देश की कहानी कुछ और होती।
उक्त अवसर पर विभाग संगठन मंत्री अवनीश राय मानस, जिला सह संयोजक कुलदीप पाण्डेय , विभाग सह संयोजक गौरव राय,अभिषेक चतुर्वेदी, सिद्धार्थ सिंह कुशवाहा , धीरज सिंह, अंबिकेश चौरसिया, शुभम पाण्डेय, स्नेहा श्रीवास्तव, रिया, संजना, अमृता, प्रिया, देविका, अंशिका, प्रियंका सिंह, सोनाली, आराध्या, सोनम समेत अनेक छात्र व छात्राओं की उपस्थिति रही।
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और इंटरनेट के इस्तेमाल को लेकर…
बरहज में दर्दनाक हादसा: ट्रेलर की चपेट में आने से युवक की मौत, भाग रहे…
AI निर्मित फोटो 75 साल के रामसुगर को 30 साल की रानी से हुआ प्यार,…
फोटो goo कुपवाड़ा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) के पास सुरक्षा…
Ai निर्मित फोटो भोपाल से निकले थे बाबा श्याम के दर्शन करने कोटा (राष्ट्र की…
लेखक: अभिषेक कुमार 17 अक्टूबर का ऐतिहासिक महत्व: विज्ञान, विश्व युद्ध, साहित्य और शांति के…