पीड़ित महिलाओं से संवाद कर जानी गईं समस्याएं और आवश्यकताएं

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। महिलाओं और बालिकाओं को संकट की स्थिति में त्वरित सहायता, संरक्षण और न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित वन स्टॉप सेंटर (सखी) का शुक्रवार को औचक निरीक्षण किया गया। सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कुशीनगर प्रभात सिंह ने केंद्र की कार्यप्रणाली का बारीकी से अवलोकन करते हुए वहां उपलब्ध सुविधाओं और सेवाओं की गुणवत्ता का वास्तविक आकलन किया।निरीक्षण के दौरान सचिव ने केंद्र में निवासरत पीड़ित महिलाओं से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं और अब तक मिल रही सहायता के बारे में जानकारी ली। इस दौरान वन स्टॉप सेंटर में कुल चार पीड़ित महिलाएं उपस्थित पाई गईं, जिनमें तीन बालिग और एक नाबालिग थीं। प्रत्येक पीड़िता से व्यक्तिगत बातचीत कर उनके प्रकरण की स्थिति, भविष्य की अपेक्षाओं और केंद्र से मिल रहे सहयोग पर चर्चा की गई।पीड़ित महिलाओं ने केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं और कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर अपने अनुभव साझा किए। सचिव ने उन्हें आश्वस्त किया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पीड़ित महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उन्हें न्याय दिलाने के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करेगा।निरीक्षण के क्रम में केंद्र की साफ-सफाई, आवासीय व्यवस्था, खान-पान, पेयजल, सुरक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं की भी समीक्षा की गई, जो संतोषजनक पाई गईं। सचिव ने व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि पीड़ित महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना वन स्टॉप सेंटर का मुख्य उद्देश्य है। साथ ही सेवाओं को और अधिक प्रभावी और संवेदनशील बनाने के लिए आवश्यक निर्देश भी दिए गए।सचिव प्रभात सिंह ने कहा कि वन स्टॉप सेंटर (सखी) महिलाओं और बालिकाओं के लिए एक ऐसा मंच है, जहां एक ही स्थान पर चिकित्सा सहायता, विधिक परामर्श, पुलिस सहयोग, काउंसलिंग और अस्थायी आवास जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना या किसी भी प्रकार के संकट से जूझ रही महिलाओं के लिए यह केंद्र सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करता है।उन्होंने केंद्र में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देशित किया कि पीड़ित महिलाओं की पहचान और मामलों से जुड़ी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाए। साथ ही सरकारी योजनाओं, कानूनी अधिकारों और पुनर्वास से जुड़ी जानकारी पीड़िताओं को सरल भाषा में उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।निरीक्षण के समय केंद्र प्रबंधक रीता यादव, पैरामेडिकल नर्स चन्दा सिंह, महिला आरक्षी शशि उपाध्याय, जिला समन्वयक (हब) नलिन सिंह और कंप्यूटर ऑपरेटर मुनीश कुशवाहा उपस्थित रहे। सभी ने केंद्र की कार्यप्रणाली और उपलब्ध सेवाओं की जानकारी दी।विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे औचक निरीक्षणों से न केवल व्यवस्थाएं दुरुस्त रहती हैं, बल्कि सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार आता है। इससे कर्मचारियों में जिम्मेदारी की भावना बढ़ती है और पीड़ित महिलाओं को बेहतर सहयोग मिल पाता है। सूत्रों के अनुसार, भविष्य में भी ऐसे निरीक्षण जारी रहेंगे, ताकि वन स्टॉप सेंटर सहित अन्य सहायता केंद्रों को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।

rkpNavneet Mishra

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