नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। कथित चुनावी अनियमितताओं, मतदाता सूची में गड़बड़ी और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर दिल्ली में सियासी घमासान तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सुप्रीम कोर्ट तक विरोध मार्च निकाला। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और अन्य विपक्षी नेताओं ने इस अभियान के जरिए चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। विपक्ष का कहना है कि मताधिकार की रक्षा और लोकतंत्र में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है। हालांकि, विपक्ष के आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकाला जा सकता है।
राहुल गांधी ने दावा किया कि उन्होंने और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर लोकतंत्र और चुनाव की निष्पक्षता को लेकर चिंता जताई थी। राहुल गांधी के अनुसार, उन्हें जवाब में याचिका दाखिल करने को कहा गया। इसके बाद INDIA ब्लॉक के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। राहुल गांधी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए उनके इस्तीफे की मांग से जुड़े सवाल उठाए और कहा कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा के लिए उनका विरोध केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट पहुंची याचिका, न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी निगाहें
विरोध मार्च के बीच राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के नेताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, राहुल गांधी की कानूनी टीम ने याचिका को लेकर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कीं और अतिरिक्त समय की मांग भी की। बाद में याचिका को सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर डायरी नंबर मिलने की सूचना सामने आई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी याचिका दाखिल किए जाने की बात कही। विपक्ष की मांगों में मतदाता सूची की जांच, कथित तौर पर गलत तरीके से हटाए गए नामों की समीक्षा और SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने तथा फॉर्म-6 और फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाया। उन्होंने SIR प्रक्रिया को रोककर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में इसकी समीक्षा कराने की मांग की। कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने भी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। वहीं, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने SIR को लेकर गंभीर आपत्तियां जताईं और मतपत्रों से मतदान की व्यवस्था बहाल करने की मांग उठाई। ये सभी विपक्षी नेताओं के आरोप और मांगें हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
अखिलेश, ममता और तेजस्वी ने भी सरकार को घेरा
दिल्ली पहुंचे समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा और चुनाव आयोग के बीच कथित सांठगांठ का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने पर तंज कसते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सबसे महत्वपूर्ण है और विपक्ष जहां भी विरोध करेगा, वही जगह जनता की आवाज का मंच बन जाएगी। सपा सांसद डिंपल यादव ने भी कहा कि प्रदर्शन स्थलों पर पाबंदियां जनता के असंतोष को समाप्त नहीं कर सकतीं। उन्होंने वोट चोरी के आरोपों के साथ महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और पेपर लीक जैसे मुद्दों का उल्लेख किया।
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी भी INDIA ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुईं। उन्होंने कहा कि विपक्ष न्याय की मांग कर रहा है और उसका संघर्ष इंसानियत के अधिकारों से जुड़ा है। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रदर्शनकारियों पर कथित लाठीचार्ज का आरोप लगाया। शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने राहुल गांधी के समर्थन में विपक्षी एकजुटता का संदेश दिया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और शशि थरूर समेत कई नेताओं की मौजूदगी ने इस प्रदर्शन को व्यापक राजनीतिक स्वरूप दिया।
प्रदर्शन पर पाबंदियां, जंतर-मंतर को लेकर नया विवाद
दिल्ली में विरोध मार्च को देखते हुए बाराखंभा रोड और कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई। पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की और प्रदर्शनकारियों की आवाजाही पर निगरानी रखी। जंतर-मंतर को प्रदर्शन के निर्धारित स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। प्रशासन की ओर से रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के CBD मैदान को वैकल्पिक प्रदर्शन स्थलों के रूप में निर्धारित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
जंतर-मंतर लंबे समय से देश के बड़े जन आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन, तमिलनाडु के किसानों का प्रदर्शन और महिला पहलवानों के आंदोलन सहित अनेक मुद्दों पर यहां लोगों ने अपनी आवाज उठाई। ऐसे में इस स्थल को प्रदर्शन सूची से हटाने के फैसले ने विरोध दर्ज कराने के अधिकार और सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल को लेकर नई बहस छेड़ दी है। रामलीला मैदान में बड़े आयोजनों के लिए बुकिंग शुल्क, सुरक्षा राशि और अनुमति की शर्तों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष का तर्क है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए सुलभ स्थान उपलब्ध होने चाहिए, जबकि प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है।
पुलिस कार्रवाई और सोशल मीडिया पोस्ट पर भी विवाद
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर भी आरोप-प्रत्यारोप सामने आए। राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने युवाओं के साथ कथित मारपीट पर सवाल उठाए। दिल्ली हाईकोर्ट परिसर में कुछ वकीलों ने पुलिस कार्रवाई के विरोध में संविधान की प्रस्तावना पढ़कर अपना विरोध दर्ज कराया। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से भी पुलिस के कथित दुर्व्यवहार के विरोध में कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की गई।
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया पर भ्रामक सामग्री और अफवाहों पर निगरानी बढ़ाने की बात कही। समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से आई जानकारी के अनुसार, करीब 300 सोशल मीडिया पोस्ट हटवाए जाने का दावा किया गया। पुलिस ने एक कथित फर्जी AI वीडियो के मामले में गिरफ्तारी की भी जानकारी दी। इन घटनाओं के बीच यह सवाल अहम हो गया है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए।
भाजपा ने विपक्ष के मार्च को बताया राजनीतिक प्रदर्शन
विपक्ष के मार्च पर भाजपा की ओर से भी प्रतिक्रिया आई। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने की कोशिश को राजनीतिक नाटक करार दिया। भाजपा नेता सिद्धार्थ यादव ने मार्च को ‘फाइव-स्टार इवेंट’ बताते हुए राहुल गांधी पर चुनावी अनियमितताओं के आरोपों को लेकर अपना रुख बदलने का आरोप लगाया। सत्ता पक्ष का रुख है कि विपक्ष को अपने आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण पेश करने चाहिए। इस तरह चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल अब राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ कानूनी बहस का विषय भी बन गए हैं।
इस बीच, दिल्ली में मेट्रो सेवाओं को लेकर जारी पाबंदियां हटाए जाने के बाद सभी स्टेशनों पर प्रवेश और निकास सामान्य होने की सूचना दी गई। हालांकि, विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामलों और प्रदर्शन स्थलों पर लगी शर्तों को लेकर राजनीतिक तथा कानूनी गतिविधियां जारी हैं। जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने और प्रदर्शनकारियों पर कथित कार्रवाई से संबंधित याचिकाओं पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई की बात भी सामने आई है।
लोकतंत्र में निष्पक्ष चुनाव और शांतिपूर्ण विरोध दोनों जरूरी
INDIA ब्लॉक के इस मार्च ने एक बार फिर चुनावी पारदर्शिता, मतदाता सूची की विश्वसनीयता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है, जबकि भाजपा इन आरोपों को राजनीतिक विरोध के रूप में देख रही है। ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि मतदाता सूची से जुड़े संदेहों का समाधान किस तरह पारदर्शी और विश्वसनीय तरीके से किया जाए।
लोकतंत्र की मजबूती केवल चुनाव कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि मतदाताओं का भरोसा बनाए रखने, शिकायतों की निष्पक्ष सुनवाई करने और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करने में भी निहित है। साथ ही, विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहें और कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान हो, यह भी उतना ही आवश्यक है। अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर होने वाली आगे की कार्रवाई और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर संबंधित संस्थाओं के जवाब पर टिकी हैं।
पेंशनरों के हक पर नहीं चलेगी कैंची! आठवें वेतन आयोग में भेदभाव के खिलाफ देवरिया…
1,796 विद्यार्थियों में अव्वल रहीं मीरा ठक्कर, अंतरराष्ट्रीय पत्र लेखन प्रतियोगिता में गुजरात में पहला…
‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ में तीन विजेता सम्मानित, सोलर चार्जर और ईवी मॉडल ने खींचा…
फोटो प्रेस विज्ञप्ति आगरा में एक्शन मोड में DM मनीष बंसल: बाजरे की पैदावार से…
वाराणसी (राष्ट्र की परम्परा)। पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल में यात्रियों और रेल कर्मचारियों को…
शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा)। शाहजहांपुर जिले के निगोही थाना पुलिस ने अपहरण और पॉक्सो एक्ट…