लखनऊ/कन्नौज (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश में चुनावी रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सियासत तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने फॉर्म-7 के कथित गलत इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए इसे लोकतंत्र के साथ बड़ा धोखा बताया है। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री ने मांग की है कि जिन लोगों पर गैर-कानूनी तरीके से वोटरों के नाम हटाने के लिए आवेदन करने का आरोप है, उनके खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।
1 फरवरी और 2 फरवरी 2026 को जारी अपने बयानों में अखिलेश यादव ने दावा किया कि PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) और अल्पसंख्यक वर्ग के मतदाताओं को निशाना बनाकर फर्जी दस्तखतों के साथ फॉर्म-7 के आवेदन जमा किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से संदिग्ध है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
न्यायिक संज्ञान और कानूनी कार्रवाई की मांग
अखिलेश यादव ने इस पूरे मामले में न्यायिक संज्ञान लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वोटरों के नाम गलत तरीके से हटाने की साजिश में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए। सपा प्रमुख ने मतदाताओं से अपील की कि वे अपनी वोटर लिस्ट में नाम जरूर वेरिफाई करें, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी समय रहते पकड़ी जा सके।
इसके साथ ही उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से कहा कि यदि कहीं भी संदिग्ध तरीके से फॉर्म-7 के जरिए नाम हटाने की कोशिश हो रही है, तो उसके खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाए।
यूपी एसआईआर के आंकड़े क्या संकेत देते हैं?
इन आरोपों के बीच 6 जनवरी से 31 जनवरी 2026 तक के फॉर्म-7 जमा होने के दिन-वार आंकड़े सामने आए हैं, जो आवेदन की संख्या में अचानक हुई तेज बढ़ोतरी की ओर इशारा करते हैं।
आंकड़ों के अनुसार, 6, 7 और 8 जनवरी को एक भी फॉर्म दर्ज नहीं हुआ। 9 जनवरी को 175 आवेदन जमा हुए, जबकि 10 जनवरी को कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। 11 जनवरी को अचानक 2,236 नए आवेदन आए, जिससे इस प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे। इसके बाद 12 जनवरी को 677, 13 जनवरी को 734, 14 जनवरी को 736, 15 जनवरी को 889 और 16 जनवरी को 906 आवेदन दर्ज किए गए।
महीने के दूसरे हिस्से में तेज हुई रफ्तार
जनवरी के दूसरे पखवाड़े में फॉर्म-7 के आवेदनों की संख्या और तेजी से बढ़ी। 17 जनवरी को 1,970 आवेदन जमा हुए, जबकि 18 जनवरी को यह संख्या बढ़कर 3,865 तक पहुंच गई। इसके बाद लगातार ऊंचे आंकड़े दर्ज किए गए—19 जनवरी को 2,674, 20 जनवरी को 2,670, 21 जनवरी को 2,848, 22 जनवरी को 2,787 और 23 जनवरी को 2,318 आवेदन सामने आए।
24 जनवरी को 2,861, 25 जनवरी को 2,797 और 26 जनवरी को 2,947 फॉर्म-7 जमा हुए। महीने के आखिरी दिनों में आवेदन की संख्या में और उछाल देखने को मिला। 27 जनवरी को 3,317, 28 जनवरी को 3,424, 29 जनवरी को 3,551 और 30 जनवरी को 4,288 आवेदन दर्ज किए गए। 31 जनवरी को एक ही दिन में 8,503 आवेदन जमा हुए, जो पूरे महीने का सबसे बड़ा आंकड़ा रहा। 31 जनवरी तक कुल 57,173 फॉर्म-7 आवेदन जमा हो चुके थे।
क्या है फॉर्म-7?
फॉर्म-7 भारत के चुनाव आयोग द्वारा उपलब्ध कराया गया एक आधिकारिक आवेदन पत्र है। इसका इस्तेमाल मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम हटाने या वोटर लिस्ट में शामिल किसी नाम पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है। यह फॉर्म तब भरा जाता है जब यह माना जाता है कि किसी मतदाता का नाम सूची में नहीं होना चाहिए।
ऐसी स्थिति तब हो सकती है जब मतदाता की मृत्यु हो चुकी हो, वह स्थायी रूप से किसी अन्य स्थान पर चला गया हो, उसका नाम दो बार दर्ज हो, या वह किसी अन्य कारण से मतदाता के रूप में पंजीकरण के योग्य न हो। इसके अलावा कोई मतदाता स्वयं भी अपना नाम वोटर लिस्ट से हटवाने के लिए फॉर्म-7 का उपयोग कर सकता है।
राजनीतिक हलचल तेज
फॉर्म-7 के बढ़ते आवेदनों और अखिलेश यादव के आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर उठे सवाल आने वाले समय में सियासी बहस का बड़ा मुद्दा बन सकते हैं।
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