देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
भाषा और साहित्य के प्रगति हेतु संकल्पित साहित्य शक्ति संस्थान,पुरैना शुक्ल,बरहज- देवरिया के सौजन्य से विश्व योग दिवस के अवसर पर गूगल मीट के माध्यम से तीन दिवसीय काव्य महोत्सव का आयोजन किया गया।जिसमें भारत के कोने-कोने से लगभग सौ रचनाकारों ने प्रतिभाग किया।यह कार्यक्रम 20 जून से 22 जून तक चला।प्रतिदिन दोपहर दो बजे कवि सम्मेलन शुरू होता तो देर शाम लगभग आठ बजे तक चलता रहता।इस मनहर और प्रेरणादायी कार्यक्रम की सफलता रचनाकारो के हिन्दी भाषा के प्रति समर्पण और त्याग को दर्शाता है, प्रथम दिन काव्यपाठ का आरम्भ अनूपपुर से पधारी कवयित्री रजनी उपाध्याय ने अपने सुमधुर स्वर मे “माँ विराजो कण्ठ मे” की वाणी वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम को गति दी।मुरादाबाद की कवयित्री दीप्ती खुराना ने स्त्री जीवन की विवशता पर आधारित कविता चालीस पाठ सुनाकर खूब वाहवाही लूटी, वही लोक गायिका मणि बेन द्विवेदी वाराणसी और वन्दना सूर्यवंशी गोरखपुर ‘के गीतों और गजलो की स्वरलहरियो ने लोक साहित्य को जीवंत कर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के संरक्षक वीरेन्द्र मिश्र बिरही ने सभी रचनाकारो को आशीर्वाद दिए।सागर के साहित्यकार बृन्दावन राय सरल की संदेशपरक रचना व दोहा छंद की सराहना सबने की।गोरखपुर की कवयित्री डा.नीरजा बसंती की रचना “जिंदगी तेरी कहानी क्या कहे,ख़ुशी गम की रवानी क्या कहे “को सुनाकर मंच जीत ली। देवरिया से पधारी कवयित्री अंजना मिश्रा के गीत “तुमको आने मे हमको बुलाने मे,कई सावन बरस गये साजना ” को सुनाकर सभी श्रोताओं को झूमने पर विवश कर दी।बेगुसराय से जुड़ी कवयित्री निभा उत्प्रेक्षा के गीत ” दिल की हर बात गुनगुनाने दो,आज थोड़ा सा मुस्कुराने दो “को गाकर सबको आह!और वाह! करने पर मजबूर कर दी।सुपौल-बिहार की कवयित्री प्रतिभा कुमारी और औरंगाबाद की कवयित्री क्षमा शुक्ला को सुनकर लगा कि हिन्दी कविता का भविष्य उज्ज्वल है, जबकिचित्रकूट के कवि अशोक प्रियदर्शी की रचनाए अत्यंत अर्थगाम्भीर्य से भरी रही।छंद शास्त्र के मर्मज्ञ रचनाकार उदयभान त्रिपाठी ने भाव और शिल्प प्रधान कविता सुनाकर सबको निःशब्द कर दिये।इसी क्रम में
इंदौर की कवयित्री दामिनी सिंह ठाकुर की रचना को सुनकर श्रोतागण रस की गंगा मे गोता लगाते रहे, तथा जयपुर की कवयित्री बीना शर्मा ने अपने हरफनमौला व्यक्तित्व के अनुसार काव्यपाठ कर कार्यक्रम मे प्राण भर दी।रूद्रपुर देवरिया के कवि प्रेम नरारण तिवारी ने मुहाबरो से बनी रचना सुनाकर अभिनव प्रयोग की एहसास दिला दी और कानपुर की कवयित्री कामिनी मिश्रा ने राम के चरित्र का गुणगान कर यश की भागी बनी तो वही सरगुजा की कवयित्री लता नायर की प्रशंसा सबने की।रीवा की कवयित्री अनुराधा पाण्डेय और गोण्डा की कवयित्री विनिता कुशवाहा ने अपनी रचना सुनाकर नव रस की धारा बहा दी।पूरे कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ कवयित्री डा.विनिता कुशवाहा गोण्डा और कवयित्री नीरजा बसंती गोरखपुर ने किया।सम्पूर्ण कार्यक्रम की समीक्षा और काव्यपाठ हेतु कवियो के क्रम का निर्धारण साहित्यशक्ति संस्थान के राष्ट्रीय संचालक डा0 पंकज शुक्ल ‘प्राणेश’ ने की।इस तीन दिवसीय कार्यक्रम मे मुख्य रूप से डा. ज्ञानेन्द्र मिश्रा देवरिया,संजीव कुमार मौर्य बलिया,रत्नेश्वर मिश्रा देवरिया,बिन्दू चौहान गोरखपुर, रिकी कमल रघुवंशी विदिशा, शाहनाज बानो चित्रकूट, सुमनलता मेरठ, लता,मनोरमा मिश्रा अयोध्या,आदि ने अपना काव्यपाठ कर हिन्दी की अलख जगाते हुए योग की महत्ता स्थापित की।
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